पीपलोद में जैनाचार्य पू. विजय पद्मदर्शनसूरिजी महाराज की पावन पधारामणी, धर्मसभा में दिया सारगर्भित संदेश

पीपलोद (सूरत)। डुमस रोड स्थित ऑडी कार शोरूम के पीछे श्री शांतिनाथ जैन संघ में जैनाचार्य पूज्य विजय पद्मदर्शनसूरिजी महाराज एवं अन्य श्रमण भगवंतों की पावन पधारामणी के अवसर पर ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य सामैया का आयोजन किया गया। पूज्यश्री की आगवानी हेतु श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण स्वागत यात्रा निकाली, जिसके पश्चात धर्मसभा का आयोजन हुआ। संघ परिवार एवं समाजजन की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। पूज्यश्री यहां तीन दिनों तक स्थिरता कर अमृतवाणी का आचमन कराएंगे।

धर्मसभा में पूज्य आचार्यश्री ने कहा कि चार गतियों में मनुष्य गति सर्वोत्तम है और मुक्ति की साधना के लिए मानव लोक ही सबसे श्रेष्ठ भूमि है। मानव जीवन केवल खाने-पीने और भोग-विलास के लिए नहीं मिला है। आज मनुष्य अर्थ और काम पुरुषार्थ की अंधी दौड़ में मानव भव के वास्तविक मूल्य को भूलता जा रहा है, जिससे वह मानसिक उलझनों और संकटों में घिरता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि संकटों से घबराने के बजाय उन्हें सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। सोना-चांदी या शेयर बाजार की चमक से मोहित होना उचित नहीं है, क्योंकि यह सच्चा प्रकाश नहीं बल्कि क्षणिक आकर्षण है। ‘इंस्टेंट मनी’ के लालच में जीवन को अस्त-व्यस्त करने से बचने की सीख देते हुए उन्होंने प्रभु को केवल होंठों पर नहीं, बल्कि हृदय में प्रतिष्ठित करने का संदेश दिया।
पूज्यश्री ने कहा कि मंदी और तेजी मन के तूफान हैं, जबकि समर्पण प्रभु की श्रेष्ठ भक्ति है। युवापीढ़ी को संयमित, संस्कारित और आध्यात्मिक जीवन अपनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने आर्य संस्कृति के संरक्षण पर विशेष जोर दिया।




