वेसु स्थित रामविहार आराधना भवन में भव्य त्रिदिवसीय महोत्सव सम्पन्न
साध्वी श्री सौम्यपूर्णाश्रीजी म. के वर्धमान तप (आयंबिल) की 100वीं ओळी एवं ‘गुणसौम्य आराधना भवन’ का हुआ लोकार्पण

सूरत। वेसु स्थित रामविहार आराधना भवन में गच्छाधिपति पूज्य आचार्य श्री अभयदेवसूरिजी महाराज, पू.आ.श्री मोक्षरत्नसूरिजी म.,पू.आ. श्री पद्मदर्शनसूरिजी महाराज सहित श्रमण–श्रमणी भगवंतों की पावन निश्रा में साध्वीजी श्री सौम्यपूर्णाश्रीजी म. के वर्धमान तप (आयंबिल) की 100वीं ओळी के उपलक्ष्य में तथा गुणसौम्य आराधना भवन के उद्घाटन अवसर पर त्रिदिवसीय महोत्सव का आयोजन भव्य रूप से किया गया।इस पावन अवसर पर आ.श्री अर्हमप्रभसूरिजी महाराज एवं आ.श्री चिरंतनरत्नसूरिजी महाराज भी अपनी पावन उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने पहुंचे।पारणोत्सव के दिन विशेष उछामणियों का लाभ लिया गया, जिसमें सूरत सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रावक–श्राविकाएं एवं पूज्यश्री के भक्तजन उपस्थित रहे।

आचार्य भगवंतों के प्रेरक उद्बोधन
सभा के दौरान पू. आ. श्री अभयदेवसूरिजी महाराज ने कहा कि,“जैसे साइकिल में हैंडल, पैडल और कैरियर होते हैं, वैसे तप धर्म में करण, करवण और अनुमोदना का महत्व है।”उन्होंने तप और त्याग को जैन शासन का हृदय बताया।पू.आ.श्री पद्मदर्शनसूरिजी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि,“जिनशासन का तप कोई खाने का खेल नहीं, बल्कि ‘न खाने’ का खेल है। तप केवल मोक्ष ही नहीं देता, बल्कि मोक्ष प्राप्ति तक सत्ता, संपत्ति, सौन्दर्य और सद्गति जैसी दिव्य भेंट भी प्रदान करता है।”
उन्होंने पू. साध्वी श्री सौम्यपूर्णाश्रीजी म. के भीष्म तप को अद्भुत और सत्त्वनिष्ठ बताते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने तप रूपी तलवार से कर्म-सत्ता पर विजय पाने का प्रयास किया है।
आराधना भवन का हुआ धूमधाम से उद्घाटन
आराधना भवन का निर्माण सिल्वर स्टोर की पहली मंजिल पर किया गया है। पूज्य गच्छाधिपति श्री की पावन निश्रा में ढोल–नगाड़ों की गूंज के साथ रंग-बिरंगे माहौल में इसका शुभारंभ किया गया।उद्घाटन अवसर पर विभिन्न लाभार्थियों का सम्मान किया गया। गुरु-पूजन का विशिष्ट लाभ मीनाबेन रमेशकुमार सोनमल शाह आरखीवाला ने भारी हर्षोल्लास के साथ उछामणी बोलकर लिया।ट्रस्टियों का भी लाभार्थियों द्वारा विशेष सम्मान किया गया।कार्यक्रम का समापन आध्यात्मिक ऊर्जा, तप-गौरव और गुरु-भक्ति की माधुर्यपूर्ण अनुभूति के साथ हुआ।



