मरणोपरांत नेत्रदान से अमर हुई भाग्यवंती देवी कानूंगा की मानव सेवा

सूरत। स्व. श्रीमती भाग्यवंती देवी कानूंगा (72), धर्मपत्नी स्व. सुखराजजी कानूंगा, के मरणोपरांत उनके परिजनों ने नेत्रदान की सहमति देकर मानव सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका सोमवार को सूरत में शांतिपूर्वक निधन हो गया। शोक की इस घड़ी में उनके पुत्र मुकेश, ललित, दिनेश एवं विकास कानूंगा ने नेत्रदान का निर्णय लेकर दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी लाने का मार्ग प्रशस्त किया।
यह सेवा कार्य तेरापंथ युवक परिषद, सूरत एवं सिवाना सेवा समिति, सूरत के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दोनों संस्थाओं ने कानूंगा परिवार के इस मानवीय निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्पद बताया। उन्होंने कहा कि नेत्रदान मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का सर्वोच्च माध्यम है, जो किसी जरूरतमंद के जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है।
संस्थाओं ने आमजन से भी मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की, ताकि अधिक से अधिक दृष्टिबाधित लोगों को नई रोशनी मिल सके। स्व. भाग्यवंती देवी कानूंगा का यह पुण्य कार्य मानव सेवा और परोपकार की अमिट मिसाल बन गया है।




