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इस वर्ष दुनिया भर के 1.65 लाख करोड़पति छोड़ेंगे अपना देश, यूएई और सिंगापुर बने पहली पसंद

हेनली वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट 2026 का खुलासा, टैक्स लाभ और बेहतर जीवनशैली की तलाश में बढ़ा रुझान

नई दिल्ली। दुनिया भर में अमीरों और उच्च संपत्ति वाले लोगों के दूसरे देशों में बसने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हेनली वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट 2026 के अनुसार इस वर्ष लगभग 1.65 लाख करोड़पति अपने मूल देश को छोड़कर किसी अन्य देश में स्थायी रूप से बसने की तैयारी कर रहे हैं। वर्ष 2025 में यह संख्या करीब 1.5 लाख थी, जिसके मुकाबले इस साल उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार बढ़ता राजनीतिक तनाव, कर नीतियों में बदलाव, आर्थिक अनिश्चितता तथा अधिक सुरक्षित और बेहतर जीवनशैली की चाहत इस प्रवृत्ति के प्रमुख कारण हैं। पहले जहां लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क जैसे महानगर अमीरों की पसंद हुआ करते थे, वहीं अब उनका रुझान कम टैक्स और व्यापार-अनुकूल देशों की ओर बढ़ रहा है।

इस सूची में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सबसे आगे है। दुबई का गोल्डन वीजा कार्यक्रम, आयकर से छूट, आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षित कारोबारी माहौल इसे दुनिया का प्रमुख वेल्थ माइग्रेशन केंद्र बना रहे हैं। एशिया में सिंगापुर दूसरी सबसे पसंदीदा मंजिल के रूप में उभरा है। मजबूत अर्थव्यवस्था, पारदर्शी प्रशासन, सुरक्षित बैंकिंग व्यवस्था और निवेश के अनुकूल वातावरण के कारण सिंगापुर भारत, चीन सहित कई देशों के धनाढ्यों को आकर्षित कर रहा है।

रिपोर्ट में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड को भी करोड़पतियों की पसंदीदा मंजिलों में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमीरों के पलायन से संबंधित देशों को निवेश, कर राजस्व और रोजगार के अवसरों के रूप में बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही वजह है कि कई देश अब अपनी कर और आर्थिक नीतियों में सुधार पर विचार कर रहे हैं ताकि पूंजी और निवेशकों का पलायन रोका जा सके।

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