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240 श्रद्धालुओं के साथ श्री वीर विरासत तीर्थ यात्रा सकुशल सम्पन्न

प्राचीन जैन तीर्थों में गूंजा जिनशासन का जयघोष, धार्मिक अनुष्ठानों से श्रद्धालु हुए भाव-विभोर

सूरत। श्री जैन नवयुवक मंडल, सूरत (जैनम) द्वारा आयोजित चार दिवसीय “श्री वीर विरासत तीर्थ यात्रा” आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति भाव के साथ सकुशल सम्पन्न हुई। 4 जून की शाम 7 बजे सूरत से रवाना हुआ 240 श्रद्धालुओं का संघ 8 जून की सुबह 8 बजे सूरत लौटा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने राजस्थान के प्राचीन एवं ऐतिहासिक जैन तीर्थों की वंदना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

यात्रा राजस्थान के सिरोही जिले स्थित प्राचीन जैन तीर्थ मीरपुर, दियाणाजी, राता महावीरजी, बोमनवाडीजी एवं लौटनाजी तक पहुंची। श्रद्धालुओं ने सभी तीर्थों पर दर्शन, वंदन एवं सेवा का लाभ लेकर अपनी आध्यात्मिक साधना को समृद्ध किया।

यात्रा के प्रथम दिवस संघ सूरत से प्रस्थान कर मीरपुर तीर्थ पहुंचा, जहां दर्शन-वंदन एवं सेवा के साथ श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद दियाणाजी में भव्य आरती का आयोजन हुआ तथा रात्रि विश्राम राता महावीरजी में किया गया।

द्वितीय दिवस राता महावीरजी में दर्शन, वंदन एवं सेवा के पश्चात संघ बोमनवाडीजी के लिए रवाना हुआ। तृतीय दिवस बोमनवाडीजी तीर्थ में दर्शन-वंदन एवं सेवा का लाभ लेने के बाद श्रद्धालुओं ने लौटनाजी स्थित प्राचीन एवं चमत्कारिक प्रतिमा के दर्शन किए और सूरत के लिए प्रस्थान किया।

यात्रा संयोजक अल्पेश छाजेड़ ने बताया कि तीर्थयात्रा के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया गया। मीरपुर तीर्थ में स्नात्र पूजा, राता महावीरजी में श्री शक्रस्तव महाअभिषेक तथा बोमनवाडीजी तीर्थ में श्री आश्रोत्ति अभिषेक का भव्य आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

यात्रा में मुख्य संघपति का लाभ ढेलडिया परिवार ने, जय जिनेंद्र का लाभ विनायकीय परिवार ने तथा बहुमान का लाभ कटारिया-संघवी परिवार ने प्राप्त किया।

यात्रा के समापन अवसर पर आयोजित बहुमान समारोह विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन जैनम के मंत्री अरुण कानूंगा ने किया। संपूर्ण यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला तथा प्राचीन तीर्थों में जिनशासन का जयघोष गूंजता रहा।

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