
सूरत। दक्षिण गुजरात में लगातार हुई मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने जनजीवन के साथ-साथ एशिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल हब सूरत के कपड़ा उद्योग को भी गहरा झटका दिया है। 7 जुलाई की बाढ़ से व्यापार संभल ही रहा था कि दोबारा आई बाढ़ जैसी स्थिति ने कारोबार को फिर से प्रभावित कर दिया। पिछले पांच दिनों में सूरत से विभिन्न राज्यों के लिए रवाना हुई करीब 180 से 200 ट्रक मुंबई हाईवे पर फंस गई हैं, जिससे लगभग 60 से 65 हजार कपड़ा पार्सल रास्ते में ही अटक गए हैं। इसके कारण व्यापारियों को करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश और जलभराव के चलते महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश तथा दक्षिण भारत के राज्यों में कपड़ों की आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो गई। दूसरी बार आई बाढ़ के कारण रिंग रोड स्थित टेक्सटाइल मार्केट एक दिन तथा सारोली क्षेत्र की सभी मार्केटों में लगातार तीन दिनों तक व्यापार पूरी तरह ठप रहा। बाहरगांव से आने वाले खरीदारों की आवाजाही रुकने से बाजारों में सन्नाटा छा गया।
फोस्टा (FOSTTA) के महामंत्री दिनेश कटारिया ने बताया कि पहली बाढ़ के दौरान करीब 20 इंच बारिश हुई थी, जिससे दो दिन तक व्यापारी केवल पानी निकालने और माल को सुरक्षित रखने में जुटे रहे। चार-पांच दिन बाद कारोबार सामान्य होने लगा था, लेकिन दोबारा आई बाढ़ ने पूरी सप्लाई चेन को अस्त-व्यस्त कर दिया। चार दिन पहले पैक किया गया माल अब भी मुंबई हाईवे पर फंसा हुआ है और 180 से 200 ट्रकों के रुक जाने से डिस्पैच व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि इस बार राहत की बात यह रही कि समय पर किए गए रखरखाव के कारण अधिकांश टेक्सटाइल मार्केटों के अंदर पानी नहीं घुसा, जिससे बड़े नुकसान से बचाव हो सका। बीते छह दिनों के नुकसान की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन व्यापार को पटरी पर लाने और लंबित ऑर्डर पूरे करने के लिए व्यापारियों ने रविवार की साप्ताहिक छुट्टी के दिन भी बाजार खोलकर कामकाज जारी रखा।



