श्रीमद् भागवत कथा में सुदामा चरित्र व भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन

सूरत। श्री रामायण प्रचार मण्डल उधना, सूरत द्वारा आशा नगर, उधना में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सातवें एवं अंतिम दिन शनिवार 23 मई को कथा वाचन करते हुए संत संदीप महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं एवं सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण के 16 हजार 108 विवाह प्रसंग का उल्लेख करते हुए सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि सुदामा बारह गुणों से सम्पन्न ब्राह्मण थे और भगवान श्रीकृष्ण के बालसखा थे। अत्यंत गरीबी में जीवन व्यतीत करने के बावजूद सुदामा कभी अपने मित्र श्रीकृष्ण के पास सहायता मांगने नहीं गए। जब उनकी पत्नी सुशीला को यह ज्ञात हुआ कि द्वारिकाधीश भगवान श्रीकृष्ण उनके पति के मित्र हैं, तब उन्होंने सुदामा को द्वारिका जाने के लिए प्रेरित किया।
संदीप महाराज ने बताया कि सुदामा ने मित्र के घर खाली हाथ जाने से मना किया, तब पत्नी सुशीला ने घर में उपलब्ध थोड़े से चावलों की पोटली बनाकर उन्हें साथ भेजा। द्वारिका पहुंचने पर भगवान श्रीकृष्ण ने अत्यंत प्रेमपूर्वक सुदामा का स्वागत किया तथा भावविभोर होकर उनके चरणों को अपने अश्रुओं से धोया। कथावाचक ने कहा कि भगवान ने सुदामा द्वारा लाए गए चावलों में से एक मुट्ठी खाई और दूसरी मुट्ठी लेने लगे तो रुक्मिणी जी ने उन्हें रोकते हुए कहा कि एक मुट्ठी में ही आपने दो लोक दे दिए, अब अपने लिए भी कुछ रखिए।
कथा के दौरान दत्तात्रेय भगवान के 24 गुरुओं तथा नव योगेश्वर संवाद का भी विस्तार से वर्णन किया गया। समापन प्रसंग में सुखदेव जी और राजा परीक्षित के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा गया कि शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा अमर है। कथावाचक ने कहा कि जिस प्रकार नदियों में गंगा श्रेष्ठ है और क्षेत्रों में काशी का महत्व सर्वोपरि है, उसी प्रकार पुराणों में श्रीमद् भागवत महापुराण श्रेष्ठ माना गया है।
कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण का लाभ प्राप्त किया।




