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चेक रिटर्न के दो मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं होने पर आरोपी बरी

सूरत। चेक रिटर्न के दो अलग-अलग मामलों में उधार दी गई रकम को लेकर पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने पर सूरत की अदालत ने आरोपी को निर्दोष घोषित करते हुए बरी करने का आदेश दिया।

मामले की जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता राकेशकुमार बजरंगलाल लाठ यार्न ट्रेडिंग के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। शिकायतकर्ता और आरोपी लूणकरण उर्फ कपिलभाई धूत दोनों मूल रूप से राजस्थान के निवासी होने के कारण लंबे समय से परिचित एवं मित्र थे। आरोपी ने अपने व्यवसाय के लिए तत्काल धनराशि की आवश्यकता होने की बात कहकर वर्ष 2018 के दौरान शिकायतकर्ता से अलग-अलग किश्तों में कुल 5.50 लाख रुपए नकद उधार लिए थे।

आरोपी ने यह राशि 8 से 10 महीनों में लौटाने का आश्वासन दिया था। समयावधि पूरी होने के बाद शिकायतकर्ता द्वारा रकम मांगने पर आरोपी ने भुगतान के रूप में द फाइनेंशियल को-ऑपरेटिव बैंक, अभिषेक मार्केट शाखा, सूरत के पोस्ट डेटेड चेक दिए थे। इनमें 68,750 रुपए के दो चेक सहित कुल 1,37,500 रुपए की राशि के चेक शामिल थे। शिकायतकर्ता द्वारा चेकों को द सूटेक्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में जमा कराने पर 18 अप्रैल 2019 को “अकाउंट क्लोज्ड” कारण दर्शाते हुए चेक वापस लौट आए थे।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोपी के खिलाफ सूरत कोर्ट में चेक रिटर्न की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अधिवक्ता युसुफखान पठाण ने विस्तृत दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष ने विभिन्न न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा उधार दी गई रकम के संबंध में कोई दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

यह मामला जज जितेंद्र सिंह की अदालत में चला, जहां अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को निर्दोष करार देते हुए बरी करने का आदेश दिया।

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