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बढ़ती लागत, कमजोर ग्राहकी और वैश्विक अस्थिरता से दबाव में कपड़ा उद्योग: चम्पालाल बोथरा

बिजली दरों में राहत और MSME के लिए सस्ती कार्यशील पूंजी समय की मांग

सूरत- देश का कपड़ा एवं गारमेंट उद्योग वर्तमान समय में अनेक गंभीर चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। लगातार बढ़ती उत्पादन लागत, भीषण गर्मी के कारण बाजारों में कमजोर ग्राहकी तथा वैश्विक व्यापारिक अस्थिरता ने उद्योग पर व्यापक दबाव बना दिया है। कैनफ़ेड्रेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के टेक्सटाइल & गारमेंट कमेटी के चेयरमैन
ने कहा कि सूरत सहित देश के प्रमुख कपड़ा बाजारों में इस समय व्यापारिक गतिविधियां अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई हैं। अत्यधिक गर्मी के कारण रिटेल बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम हुई है, जिसका सीधा प्रभाव फैब्रिक एवं तैयार गारमेंट्स की बिक्री पर पड़ा है। व्यापारियों द्वारा सीमित खरीदारी किए जाने से बाजार में नकदी प्रवाह भी प्रभावित हुआ है।

श्री बोथरा ने कहा कि कपास, यार्न, डाई-केमिकल, बिजली, गैस, परिवहन एवं मजदूरी सहित उत्पादन से जुड़े लगभग सभी खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है। गुजरात सहित विभिन्न कपड़ा केंद्रों में कॉटन यार्न और प्रोसेसिंग लागत बढ़ने से संपूर्ण सप्लाई चेन पर अतिरिक्त दबाव बना है। वहीं अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सिंथेटिक एवं पॉलिएस्टर सेक्टर पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में भी भारतीय कपड़ा एवं गारमेंट उद्योग को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। यूरोप और अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में मांग कमजोर बनी हुई है, जबकि विदेशी खरीदार कम कीमतों पर खरीदारी का दबाव बना रहे हैं। इससे भारतीय निर्यातकों के लाभांश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

श्री बोथरा ने कहा कि कपड़ा उद्योग देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और निर्यात का एक महत्वपूर्ण आधार है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकारों को उद्योग के लिए राहतकारी कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने बिजली दरों में रियायत, MSME इकाइयों के लिए सस्ती कार्यशील पूंजी, निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को मजबूत करने तथा टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के लिए विशेष सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

उन्होंने आगे कहा कि उद्योग को बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप नवाचार, गुणवत्ता, ब्रांडिंग एवं स्थिरता पर विशेष ध्यान देना होगा। आधुनिक तकनीक और वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्य करने वाली इकाइयां भविष्य में अधिक प्रतिस्पर्धी और मजबूत बनकर उभरेंगी।

अंत में श्री बोथरा ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार, उद्योग जगत एवं व्यापारिक संगठनों के समन्वित प्रयासों से भारतीय कपड़ा एवं गारमेंट उद्योग पुनः मजबूती के साथ विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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