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करुणा, सेवा और साधना के युगद्रष्टा संत आचार्य चंदना जी ‘ताई माँ’ का महाप्रयाण

सूरत। मानवता, करुणा और निस्वार्थ सेवा की सजीव प्रतिमूर्ति पद्मश्री से सम्मानित जैन साध्वी आचार्य श्री चंदना जी ‘ताई माँ’ का बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को प्रातः लगभग 10:50 बजे पुणे में शांतिपूर्वक महाप्रयाण हो गया। उनके निधन से जैन समाज सहित संपूर्ण मानवता ने एक करुणामयी संत, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और सेवा साधना की अखंड ज्योति को खो दिया है। उनके जाने से सेवा, त्याग और साधना का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया।
आचार्य चंदना जी ने अपना संपूर्ण जीवन मानव सेवा, शिक्षा, नारी सशक्तिकरण, चिकित्सा सेवा और जीव दया को समर्पित किया। उनके द्वारा स्थापित वीरायतन संस्था ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आपदा राहत एवं दिव्यांगजन सेवा के क्षेत्र में देश-विदेश में उल्लेखनीय कार्य किए। ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा शिविर, अस्पताल सेवाओं और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों के माध्यम से लाखों लोगों को नई आशा मिली। पशु-पक्षियों के संरक्षण और करुणा के प्रसार में भी उनका योगदान अतुलनीय माना जाता है।
सूरत के शिव शक्ति मार्केट में लगी भीषण आग के समय भी ताई माँ की संवेदनशीलता सामने आई थी, जब उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए शिक्षा एवं चिकित्सा सहायता हेतु वीरायतन द्वारा हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया था। उनका संदेश था कि मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं।
पूज्य ताई माँ के अंतिम दर्शन हेतु पार्थिव शरीर को वर्धमान प्रतिष्ठान, सेनापति बापट रोड, पुणे में 24 अप्रैल को प्रातः 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक रखा जाएगा तथा सायं 5 बजे वैकुंठ श्मशान में अंतिम संस्कार किया जाएगा। वीरायतन परिवार से जुड़े समाजसेवी चम्पालाल बोथरा सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं श्रद्धालुओं ने उनके महाप्रयाण को मानव सेवा के एक युग का अवसान बताते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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