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परम सत्य है जिनेश्वरों की वाणी : अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमण

आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में पहुंचे छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका

-धार्मिक-आध्यात्मिकता से भावित रहे राज्यपाल महोदय का जीवन : आचार्यश्री

-धर्म व अध्यात्म की सुन्दर प्रेरणा दे रहे हैं आचार्यश्री : राज्यपाल, छत्तीसगढ़

साध्वीप्रमुखाजी व साध्वीवर्याजी ने जनता को किया उद्बोधित

कांकरिया-मणिनगर ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने दी अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति, मिला मंगल आशीष

21.09.2025, रविवार, कोबा, गांधीनगर।कोबा में स्थित प्रेक्षा विश्व भारती में विराजमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में रविवार को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका भी उपस्थित हुए। वे प्रातःकालीन आयोजित होने वाले मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान आचार्यश्री के दर्शनार्थ उपस्थित हुए। उन्होंने आचार्यश्री को वंदन कर मंच पर ही आचार्यश्री के सन्निकट विराजे। आचार्यश्री की मंगलवाणी का श्रवण करने के उपरान्त उन्होंने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री का उनसे संक्षिप्त वार्तालाप का क्रम भी रहा।

रविवार को मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तदुपरान्त साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने जनता को उद्बोधित किया। तत्पश्चात महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से मंगल संबोध प्रदान करते हुए कहा कि दुनिया में कुछ चीजें स्पष्ट होती हैं और कुछ चीजें अदृश्य भी होती हैं, जो सामान्यतया आम आदमी के लिए अस्पष्ट होती हैं। आकाश, धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय सामान्य आदमी के लिए अस्पष्ट हैं। आगम में बताया गया है कि जो जिनेश्वरों ने जो प्रवेदित किया गया है, वही सत्य है, वह सत्य ही है। जो सच है, जो सच्चाई है, जो यथार्थ ज्ञान है, उसके अनुमोदना होनी चाहिए। जिनेश्वर नहीं समक्ष उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए शास्त्र आदि उपयोगी बन सकते हैं। हम सभी अल्पज्ञ हैं। इसलिए जिनेश्वर भगवान द्वारा प्रवेदित बात ही सत्य है। शास्त्रों में जिनेश्वर की वाणी ही उपस्थित है। इसलिए हमें शास्त्रों का अनुगमन, अनुश्रवण करने का प्रयास करना चाहिए।

मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका पहुंचे। उन्होंने आचार्यश्री को वंदन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरान्त आचार्यश्री के निकट ही विराजित हुए। आचार्यश्री ने उन्होंने संक्षिप्त प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि हम जैन धर्म के अनुयायी हैं। हमारा साधुता का जीवन है, जो बहुत उच्च कोटि के होते हैं। साधुओं के लिए अनेक नियम हैं। सामान्य आदमी इन कड़े नियमों को न भी पाल पाएं तो हम अपनी यात्रा में सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति की प्रेरणा दे रहे हैं। ये तीनों लोगों की जीवन में रहती हैं तो जीवन अच्छा हो सकता है। आज राज्यपाल महोदय का यहां आगमन हो रहा है। देश व राज्य में नैतिक मूल्य बने रहें। राज्यपाल महोदय का भी धार्मिक-आध्यात्मिक संदर्भों में खूब विकास होता रहे, यह काम्य है।

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि देश में भले में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ की संख्या में छोटी है, किन्तु देश की इकोनॉमी और धार्मिक क्षेत्र में बहुत ज्यादा है। आप लोग अहिंसा में विश्वास करते हैं। मेरा मानना है कि अहिंसा पूरे विश्व में होना चाहिए। मुझसे एक छात्र ने पूछा था कि आज विश्व में सबसे बड़ा खतरा क्या है? मेरा मानना है कि आज विश्व का सबसे बड़ा खतरा न्यूक्लियर हथियार हैं। दूसरा बड़ा खतरा वातावरण का असंतुलन है। इसे रोकने का हम सभी को प्रयास करना चाहिए और वातावरण को संतुलित बनाए रखने में अहिंसा परम आवश्यक है। आचार्यश्री जन-जन को अहिंसा की ही प्रेरणा दे रहे हैं। नशा एक बीमारी के रूप में देश को निगल रहा है। नशामुक्ति की प्रेरणा भी धर्म से ही प्राप्त हो सकता है। आचार्यश्री से धर्म का मार्गदर्शन प्राप्त आप सभी को हो रहा है। हम सभी को अच्छे मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए, जिससे समाज और देश का विकास हो सकता है।

मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि आप सभी इतनी बड़ी संख्या में आचार्यश्री की वाणी को सुनने के लिए उपस्थित हुए हैं। धर्म और अध्यात्म की अच्छी प्रेरणा आचार्यश्री से मिलती है और बिना धर्म और अध्यात्म के हमें शांति नहीं मिल सकती। आचार्यश्री राज्यपाल महोदय से संक्षिप्त वार्तालाप के लिए पधारे। तब तक उपस्थित जनता को साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने उद्बोधित किया। आचार्यश्री पुनः पधारे और आगे कहा कि आज अमावस्या है, कल से आश्विन शुक्ल पक्ष नवरात्रि का क्रम प्रारम्भ होगा। हमारे यहां आध्यात्मिक अनुष्ठान चलता है। आचार्यश्री ने नवरात्र में रहने वाले आध्यात्मिक अनुष्ठान के संदर्भ में जनता को उत्प्रेरित किया।

मुनि मदनकुमारजी ने लोगों को तपस्या के संदर्भ में जानकारी दी। कांकरिया-मणिनगर ज्ञानशाला की संयोजिका श्रीमती सावित्री लुणिया ने अपनी अभिव्यक्ति दी। कांकरियाण-मणिनगर ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने पच्चीस बोल पर आधारित अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों को मंगल प्रेरणा प्रदान की। मेवाड़ में स्थित तुलसी अमृत निकेतन-कानोड़ के संचालक श्री कल्याणसिंह पोखरना ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। श्रीमती सज्जनदेवी ने गीत का संगान किया।

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