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जो दूसरों के लिए पीड़ा दायक हो,ऐसी वाणी हमें नहीं बोलनी चाहिए- मुनि अजीत सागर महाराज

सूरत।श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर भटार रोड पर सोमवार के दिन धर्म सभा में मुनि विवेकानंद सागर महाराज ने कहा कि सत्य की पहचान कीजिए ,सत्य की निष्ठा निर्मल भाव से है, सत्य का आचरण विभीषण के पास था। सत्य अनुभव की वस्तु है शब्दों की नहीं, जो आप और हम जी रहे हैं वह असत्य है। इसके बाद मुनि अजीत सागर महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि जो सत्य है वह शाश्वत है मुख में जीभ सत्य हैं पर दांत असत्य हैं जीभ पहले भी थी अब भी है ,पर दांत बाद में आए और पहले चले गए जो हमेशा मेरे साथ बना रहे वही सत्य है। जीवन में उत्तम सत्य के लिए निंदा एवं झूठ का त्याग जरूरी है, क्योंकि सत्यवादी सदा सुखी रहता है वसु राजा असत्य से नरक गया, पर नारद मुनि सत्य पर अड़ीग रहे तो स्वर्ग गये। इंसान को एक झूठ को छुपाने के लिए हजारों झूठ बोलने पड़ते हैं ,मगर झूठ पकड़ में आने पर व्यक्ति कि साख खराब हो जाती है।जो दूसरों के लिए पीड़ा दायक हो, कष्टकारी हो ऐसी वाणी हमें नहीं बोलनी चाहएं ,थोड़ा बोले पर हितकारी बोले। प्रिय वचनों का सहारा लेकर ही व्यवहार चलाना चाहिए। किसी भी प्राणी की रक्षा के लिए बोला गया झूठ भी सत्य कहलाता हैं ।

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