ध्यान से समता की चेतना का करें विकास : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण
दो प्रसिद्ध जैनाचार्यों के आध्यात्मिक मिलन की स्थली बनी झील नगरी उदयपुर

-राजस्थान के जनजाति मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी ने किए आचार्यश्री के दर्शन
-उदयपुरवासियों ने आज भी दी भावनाओं को अभिव्यक्ति
-आचार्यश्री ने किया सान्ध्यकालीन विहार, पहुंचे इंटरनल हैण्डीक्राफ्ट फैक्ट्री
-विहार के दौरान आचार्यश्री पुलकसागरजी से हुआ आध्यात्मिक मिलन
–मार्ग में मध्यप्रदेश के मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय भी शांतिदूत के दर्शन से हुए लाभान्वित
26.11.2025, बुधवार, भुवाणा, उदयपुर (राजस्थान) :झीलों की नगरी उदयपुर प्रवास का तीसरा दिवस। भुवाणा स्थित ‘महाप्रज्ञ विहार’ में विराजमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की अभिवंदना में मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम बुधवार को भी श्रद्धालओं ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी श्रीचरणों में अर्पित की। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगल प्रवचन के उपरान्त ‘महाप्रज्ञ विहार’ से सान्ध्यकालीन विहार कर रात्रिकालीन प्रवास हेतु ‘इंटरनल हैण्डीक्राफ्ट’ फैक्ट्री में पधारे। इस विहार के दौरान देवेन्द्र धाम में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी का मधुर मिलन प्रसिद्ध जैनाचार्य पुलकसागरजी से आध्यात्मिक मिलन हुआ। जो महान जैनाचार्यों का आध्यात्मिक पूरे उदयपुर के जैन समाज को हर्षान्वित करने वाला अवसर बन गया। कुछ समय मिलन के पश्चात आचार्यश्री ने वहां से विदा ली और रात्रिकालीन प्रवास के लिए निर्धारित स्थान में पधारे। इससे पूर्व आचार्यश्री के सान्ध्यकालीन विहार में मध्यप्रदेश के मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए और आचार्यश्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

इसके पूर्व प्रातःकालीन मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम के दौरान ‘महाश्रमण समवसरण’ में उपस्थित श्रद्धालुओं को महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि ध्यान भी एक साधना है। परम पूज्य आचार्यश्री महाप्रज्ञजी प्रेक्षाध्यान का प्रयोग कराते थे। इसमें भी अनेक प्रकार के प्रयोग होते हैं। ध्यान के द्वारा आदमी राग-द्वेष मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ जाए, यह खास बात होती है। आदमी का कषाय मंद हो जाए और समता की चेतना का विकास हो जाए, तो उसका यह बड़ा फल प्राप्त हो सकता है।
गुस्सा शांत हो जाए, अहंकार की भावना दूर हो जाए, माया, मूर्च्छा, लोभ भी कमजोर पड़े, ऐसा अभ्यास होना चाहिए। सामायिक भी एक तरह की अच्छी साधना है। शनिवार की सायं सात से आठ बजे के बीच सामायिक का क्रम अच्छा चला है। कोई अपने दैनिक दिनचर्या में प्रतिदिन सामायिक का प्रयास कर ले तो उसके जीवन का अच्छा क्रम हो सकता है।
मानव जीवन में कुल सात व्यसन बताए गए हैं। उसमें एक व्यसन है, हिंसा करना। साधु तो सदुपयोग देने वाले होते हैं। साधु हिंसा का त्याग कर अहिंसा के पथ पर स्वयं तो चलते ही हैं, दूसरों को भी इसके लिए उत्प्रेरित करते हैं। ऐसे अहिंसामूर्ति, त्यागमूर्ति साधुओं के मुखदर्शन से ही पाप झड़ते हैं और पुण्य का बंध होता है। ऐसे साधु यदि सदुपदेश दें कि प्राणियों की हिंसा से बचने का प्रयास हो और कोई हिंसा का परित्याग कर दे तो उसके जीवन में कितना अच्छा बदलाव हो सकता है। साधु में संयम-साधना हो तो वही साधु की असली सम्पत्ति होती है। ऐसे साधनाशील साधु को देवता भी नमस्कार करते हैं।

आचार्यश्री ने आगे कहा कि आचार्यश्री महाप्रज्ञजी की इस चतुर्मास स्थली में हमारा आना हो गया और जिस मंच से आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने प्रवचन किया था, वहां हमारा प्रवचन भी हो रहा है। हमारे पूर्वाचार्यों द्वारा जो संदेश, निर्देश, उपदेश दिए गए हैं, उनको भी यथासंभवतया अपने ध्यान में रखने का और अनुपालन करने का प्रयास होना चाहिए। यहां की जनता में खूब अच्छी धार्मिक भावना बनी रहे। संस्थाओं में धार्मिक-आध्यात्मिक गतिविधियां चलती रहें। आने वाले साधु-साध्वियों से अच्छा आध्यात्मिक-धार्मिक लाभ लिया जाता रहे।
दो चतुर्मास के बाद आचार्यश्री के दर्शन करने वाली साध्वी उज्जवलप्रभाजी को भी आचार्यश्री ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। साध्वी उज्जवलप्रभाजी ने अपने हृदयोद्गार व्यक्त करते हुए सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का संगान किया।

दिगम्बर जैन समाज की ओर से तरुणसागर चतुर्मास समिति के संयोजक श्री विनोद जैन, महावीर स्वाध्याय समिति के अध्यक्ष श्री प्रकाश जैन, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष श्रीमती प्रणिताजी, टीपीएफ के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र चण्डालिया, स्थानीय तेरापंथी सभाध्यक्ष श्री कमल नाहटा, श्री धीरेन्द्र मेहता आदि ने अपनी अभिव्यक्ति दी। ज्ञानशाला की प्रशिक्षक व प्रशिक्षिकाओं ने सामूहिक रूप से गीत का संगान किया। श्री लक्ष्मण कर्णावट ने अपने परिवार के साथ अपनी भावाभिव्यक्ति दी व अपनी आत्मकथा भी श्रीचरणों में लोकार्पित किया। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में पहुंचे राजस्थान के जनजाति मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी ने भी आचार्यश्री के समक्ष अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
सायं चार बजे आचार्यश्री ने ‘महाप्रज्ञ विहार’ से सान्ध्यकालीन विहा
र
किया। विहार के दौरान मध्यप्रदेश के शहरी विकास तथा आवास एवं संसदीय मामलों के मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय भी आचार्यश्री के दर्शन से लाभान्वित हुए। विहार के दौरान वे भी आचार्यश्री के आसपास पैदल चलकर मानों अपने सौभाग्य को जागृत कर रहे थे। कुछ समय उपरान्त वे आचार्यश्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त कर अपने गंतव्य को रवाना हो गए। लोगों को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए आचार्यश्री इंटरनल हैण्डीक्राफ्ट फैक्ट्री के स्थान में पधारे। जहां आचार्यश्री का रात्रिकालीन प्रवास हुआ। अपने प्रतिष्ठान में पधारने से नाहटा परिवार भावविभोर बना हुआ था।




