शक्ति के साथ संयम आवश्यक : युगप्रधान आचार्य महाश्रमण
टीपीएफ द्वारा राष्ट्रीय प्रशासनिक ऑफीसर्स सम्मेलन आयोजित

– प्रशासन में सेवा के साथ शुद्धता लिए गुरुदेव ने किया प्रेरित
13.09.2025,शनिवार , कोबा, गांधीनगर।
अहिंसा यात्रा प्रणेता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में आज छठे राष्ट्रीय प्रशासनिक ऑफीसर कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ। गुरूदेव की अमृत प्रेरणा सभी के जीवन में एक नवीन बदलाव लाने वाली होती है। प्रतिवर्ष होने वाली इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में देश के कोने कोने से प्रशासनिक अधिकारी प्रेक्षा विश्व भारती कोबा के प्रांगण में पहुंचे है। कार्यक्रम में जैन विश्व भारती द्वारा प्रज्ञा पुरस्कार सम्मान समारोह भी आयोजित हुआ। जैविभा के अध्यक्ष श्री अमरचंद लुंकड, श्री पंकज बोथरा ने अपने विचार रखे। आईपीएस श्री अरुण बोथरा को यह पुरस्कार दिया गया।

मंगल प्रवचन फरमाते हुए आचार्य प्रवर ने कहा – जहां सम्यकत्व होता है, वहां ज्ञान होता है और जहां ज्ञान होता है वहां सम्यकत्व हॉता है। सम्यकत्व का बोध ज्ञान और मिथ्यात्वी का ज्ञान अज्ञान है। ज्ञान और चारित्र के विकास से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। हर साधक को ज्ञान व संयम का विकास करते रहना चाहिए। ज्ञान और चारित्र का विकास ही मोक्ष प्राप्ति का साधन है। किसी के पास ज्यादा शक्ति हो, पैसे हो, बड़ा पद या ज्ञान हो। उनका उपयोग अच्छे कार्यों में होना चाहिए। शक्ति के साथ संयम रहना आवश्यक है। जिस कर में लाइट व ब्रेक नहीं हो तो वह कभी भी दुर्घटना ग्रस्त हो सकती है। हमारे जीवन में भी ज्ञान की लाइट व संयम का ब्रेक हो।

प्रशासनिक अधिकारियों को प्रेरणा प्रदान करते हुए आचार्यश्री ने कहा प्रशासन के क्षेत्र में सेवा में कैसे शुद्धता रहे यह आवश्यक है। प्रशासन में आना हर किसी के लिए सरल नहीं होता। कार्य में ऑनेस्टी, मोरलिटी के प्रति जागरूकता रहे। कई बार ऐसा अवसर भी हो सकता है जब बेइमानी से धन कमाया जा सकता है, किन्तु ऐसे में भी अपनी ईमानदारी को ना छोड़े। प्रशासन में नैतिकता के रास्ते पर चले। लौकिक के साथ साथ लोकोत्तर, व्यक्तिगत धर्म भी जीवन में रहे। लौकिक सेवा की अपनी उपयोगिता है, धर्म व्यक्ति का अपना होता है। आत्मा का जो भला करे वह कार्य शुद्ध धर्म है।
तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रशासनिक ऑफीसर्स सम्मेलन के अंतर्गत एडिशनल डीजीपी रेलवे एंड कोस्टल सिक्यॉरिटी से आईपीएस श्री अरुण बोथरा, श्री पुष्प जैन ने अपने विचारों की प्रस्तुति दी।




