
सूरत। गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रवक्ता नरेंद्र रावत ने गुरुवार को सूरत में पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए राज्य की शिक्षण व्यवस्था की बदहाल स्थिति पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नीतिआयोग की 2024 की रिपोर्ट में गुजरात गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में 18वें स्थान पर है। शिक्षा का व्यापारीकरण हो चुका है और भाजपा सरकार जानबूझकर सरकारी स्कूल-कॉलेजों को कमजोर कर निजी संस्थानों को बढ़ावा दे रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि 1995 से कोई नई सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित नहीं हुई। पिछले आठ वर्षों में 525 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं, जबकि सरकार 5912 और स्कूल बंद करने की तैयारी में है। इसके विपरीत, निजी स्कूलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। केंद्र सरकार के UDISE+ सर्वे के अनुसार, गुजरात में शिक्षकों की भारी कमी है। आज 2936 स्कूल केवल एक ही शिक्षक से चल रही हैं। 14,562 स्कूलों में एक ही कक्षा में कई स्तर के छात्रों को पढ़ाने की मजबूरी है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य में 40,000 से अधिक शिक्षकों की जगह खाली है और 42,000 से अधिक कक्षाओं की कमी है। 7000 स्कूलों में खेल का मैदान नहीं है और 15 वर्षों से न तो खेल शिक्षक, न ही लाइब्रेरियन की भर्ती हुई है। सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 45 से 65 प्रतिशत शिक्षकों की सीटें खाली हैं, जबकि निजी विश्वविद्यालयों को मनमानी फीस वसूलने की छूट दी गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने मनपसंद कुलपतियों की नियुक्ति कर उच्च शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए नियमों के खिलाफ नियुक्तियाँ की जा रही हैं, जिससे शिक्षकों और छात्रों में निराशा है।
कांग्रेस ने कहा कि राज्य की 66% से अधिक यूनिवर्सिटीज और 78% कॉलेजों ने NAAC मान्यता प्राप्त नहीं की है। यह दर्शाता है कि शिक्षण संस्थाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, योग्य शिक्षकों और आवश्यक सुविधाओं का घोर अभाव है।
पत्रकार परिषद में सूरत शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपुल उधनावाला, पूर्व सेनेट सदस्य भावेश रबारी, प्रवक्ता किरण रायका और अनुप राजपूत समेत कई पदाधिकारी मौजूद थे




