तापी प्राकट्य महोत्सव पर 121 टेक्सटाइल मार्केट में गूंजेगा ‘जय मां तापी’

सूरत। श्री अखिल भारतीय जीण माता सेवा संघ, सूरत द्वारा मां तापी प्राकट्य महोत्सव इस वर्ष भी श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ 20 जुलाई, सोमवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर रिंग रोड और सारोली स्थित लगभग 121 टेक्सटाइल मार्केटों में एक साथ मां तापी महापूजन एवं सामूहिक आरती का आयोजन होगा, जिससे पूरे टेक्सटाइल क्षेत्र में “जय मां तापी” के जयघोष गूंजेंगे।
कार्यक्रम संयोजक रमेश खंडेलवाल एवं अभिषेक करवा ने बताया कि मां तापी सूरत की अधिष्ठात्री देवी हैं, जिन्होंने वर्षों से प्रवासी और स्थानीय व्यापारियों को सम्मान, समृद्धि और व्यापारिक उन्नति का आशीर्वाद दिया है। उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से सभी 121 टेक्सटाइल मार्केटों के अध्यक्षों को तापी कलश एवं विशेष पूजन किट भेंट की गई। पूजन किट में मटका परिधान, दीपक, कुमकुम, चावल, अगरबत्ती, माचिस, आरती पत्रक और मोदक प्रसाद शामिल हैं।
संघ ने इस अभियान के लिए तीन-तीन सदस्यों की टीमें गठित कीं, जिन्होंने प्रत्येक मार्केट के अध्यक्षों से संपर्क कर अपने-अपने मार्केट परिसर में सभी व्यापारियों के साथ सामूहिक तापी पूजन और आरती आयोजित करने का आग्रह किया।
इसी कड़ी में श्री जीण माता सेवा संघ एवं तापी कुबेरेश्वर महादेव समिति के संयुक्त तत्वावधान में 20 जुलाई को शाम 4 बजे तापी कुबेरेश्वर महादेव ओवारा (उमरा पुल के पास, आरटीओ के आगे, पाल रोड) पर भव्य मां तापी प्राकट्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा।
संघ ने डिजिटल माध्यमों से भी महोत्सव को जन-जन तक पहुंचाने की पहल करते हुए मां तापी की आकर्षक डीपी, आरती और 108 नाम सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित किए हैं। सभी सूरतवासियों से अपील की गई है कि वे अपने व्हाट्सएप स्टेटस और डीपी पर मां तापी का संदेश लगाकर श्रद्धा प्रकट करें। साथ ही प्रत्येक श्रद्धालु से एक दीप मां तापी के नाम प्रज्ज्वलित करने, मिष्ठान का भोग लगाने तथा तापी शुद्धिकरण एवं “बेटी बचेगी तो सृष्टि रचेगी” का संकल्प लेने का भी आह्वान किया गया।
इस आयोजन को सफल बनाने में आशु गर्ग, गोविंद जिंदल, मनीष, नंदू मोहता, रघु खंडेलवाल, राजेश काबरा, राजेंद्र राजपुरोहित, दिलीप पटेल, बनवारी क्याल, दिनेश जैन, प्रहलाद मित्तल, वेद प्रकाश शर्मा, मुकेश महेश्वरी, सूरज पटेल, हर्ष शर्मा, सांवर अग्रवाल सहित अनेक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही।




