राजस्थानसामाजिक/ धार्मिक

अंतरराष्ट्रीय नेत्रदान दिवस पर अभातेयुप ने किया नेत्रदान का आह्वान

6000 से अधिक कॉर्निया दान और 400 से ज्यादा शहरों में सेवा कार्य का दावा

जोधपुर। अंतरराष्ट्रीय नेत्रदान दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) ने नेत्रदान के प्रति जनजागृति बढ़ाने का आह्वान करते हुए इसे मानवता का महनीय उपहार बताया। संगठन ने कहा कि नेत्रदान ऐसा पुण्य कार्य है, जिससे दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में प्रकाश का संचार किया जा सकता है।

अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन मांडोत ने बताया कि परिषद सेवा, संस्कार और संगठन के त्रिआयामी उद्देश्यों के साथ भारत और नेपाल में फैली 368 शाखाओं के माध्यम से विभिन्न सामाजिक गतिविधियां संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि संगठन ने नेत्रदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए देश और नेपाल के 400 से अधिक शहरों में नेत्रदान करवाने का कार्य किया है।

अभातेयुप के महामंत्री सौरभ पटावरी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ ब्लाइंडनेस (IAPB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि विश्व में लगभग 4.3 करोड़ लोग दृष्टिबाधित हैं, जबकि करीब एक करोड़ लोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित हैं। इनमें लगभग 12 लाख लोग भारत में हैं। विश्वभर में प्रतिवर्ष लगभग 2 से 2.5 लाख कॉर्निया संग्रहित किए जाते हैं, जिनमें से 25 से 30 हजार कॉर्निया भारत में एकत्रित होते हैं।

नेत्रदान राष्ट्रीय प्रभारी कैलाश जैन ने बताया कि अभातेयुप अब तक 6000 से अधिक कॉर्निया दान करवाने के साथ नेत्रदान हेतु सर्वाधिक स्वैच्छिक मरणोपरांत शपथ पत्र भरवाने के लिए वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ बुक में अपना नाम दर्ज करा चुकी है।

उन्होंने बताया कि अभातेयुप की शाखा तेरापंथ युवक परिषद, सरदारपुरा ने जोधपुर में नेत्रदान के क्षेत्र में विशेष कार्य किया है। परिषद के सहयोग से अब तक 400 से अधिक नेत्रदान संपन्न कराए जा चुके हैं तथा 2000 से अधिक ऑनलाइन नेत्रदान प्रतिज्ञा पत्र भरवाए गए हैं। इसके अलावा समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं।

परिषद अध्यक्ष मनसुख संचेती ने बताया कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो व्यक्तियों को दृष्टि मिल सकती है। नेत्रदान में पूरी आंख नहीं निकाली जाती, बल्कि केवल कॉर्निया नामक पतली पारदर्शी परत का प्रत्यारोपण के लिए उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया से मृतक के शरीर की संरचना पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि परिवार की सहमति से किसी भी आयु के व्यक्ति का मरणोपरांत नेत्रदान संभव है तथा मृत्यु के छह घंटे के भीतर आई बैंक की सहायता से यह प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

उन्होंने जोधपुर शहर में नेत्रदान संबंधी सहायता एवं जानकारी के लिए 8209924807 पर संपर्क करने की अपील करते हुए कहा कि नेत्रदान समाज को प्रकाश देने वाली एक अनमोल सेवा है, जिसे अधिक से अधिक लोगों को अपनाना चाहिए।

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