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ईर्या समिति के प्रति जागरूक रहे साधु : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण

-मुनि नमिकुमारजी ने आचार्यश्री से 42 की तपस्या का किया प्रत्याख्यान-त्रिदिवसीय तेरापंथ किशोर मण्डल का अधिवेशन गुरु सन्निधि में सुसम्पन्नकिशोरों ने दी अपनी भावनाओं को प्रस्तुति, आचार्यश्री से मिला मंगल आशीर्वाद

31.05.2026, रविवार, लाडनूं :गत कई दिनों से राजस्थान में लगातार मौसम में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। तपती गर्मी के बाद तेज आंधी और तूफान के बाद ओलावृष्टि और फिर रेतीली आंधी के कारण सामान्य जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, किन्तु तेरापंथ धर्मसंघ की राजधानी लाडनूं के जैन विश्व भारती में विराजमान वर्तमान अधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की छत्रछाया में सभी आध्यात्मिक गतिविधियां निर्विघ्न रूप से संचालित हो रही हैं।

रविवार को सुधर्मा सभा में आयोजित प्रातःकालीन मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को अध्यात्मवेत्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आज के निर्धारित विषय ‘ज्यादा तेज न चलें’ के आधार पर पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि सामान्यतया साधु को ज्यादा तेज नहीं चलना चाहिए। कोई कठिनाई अथवा विशेष परिस्थिति की बात अलग है, किन्तु साधु को ज्यादा तेज नहीं चलना चाहिए। ईर्या समिति की दृष्टि से भी ज्यादा तेज नहीं चलना अकुलता की बात होती है। ज्यादा तेज चना जीव विराधना का कारण बन सकता है। जितना संभव हो सके, पैरों से ही चलने का प्रयास होना चाहिए। पदयात्रा में ईर्या समिति की जितनी अच्छी पालना हो सकती है, साधना का प्रयोग करने वाले को तो बिल्कुल भी नहीं होती।

द्रुत गति से चलने वाला साधु पाप श्रमण की श्रेणी में आ सकता है। साधु के लिए सुन्दर बताई गई है कि साधु को द्रुत गति से चलने से बचने का प्रयास होना चाहिए। साधु की गति मंद और सुन्दर होनी चाहिए। साधु की गति मंद होती है तो साधु की ईर्या समिति का पूरी जागरूकता के साथ पालित हो सकती है। यह संयम की दृष्टि से बहुत अच्छी बात हो सकती है। ईर्या समिति की शिक्षा हमें अपने गुरुओं से भी मिल सकती है। परम पूज्य आचार्यश्री तुलसी व परम पूज्य आचार्यश्री महाप्रज्ञजी को भी कितनों देखा है, उनके जीवन से भी प्रेरणा प्राप्त की जा सकती है।

मंगल प्रवचन के उपरान्त मुनि नमिकुमारजी ने आचार्यश्री से 42 की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के तत्त्वावधान में तेरापंथ युवक परिषद का त्रिदिवसीय 21वां राष्ट्रीय अधिवेशन कार्यक्रम का आज मंचीय उपक्रम रहा। इस संदर्भ में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पवन माण्डोत, महामंत्री श्री सौरभ पटावरी, तेरापंथ किशोर मण्डल के राष्ट्रीय प्रभारी श्री मयंक धाकड़ ने अपनी अभिव्यक्ति दी। अधिवेशन में सम्मिलित किशोरों ने गीत का संगान किया। तदुपरान्त किशोरों ने अपनी प्रस्तुति भी दी।

 

आचार्यश्री ने किशोरों को पावन पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद से जुड़ा हुआ यह किशोर मण्डल है। जानकारी मिली कि चारित्रात्माओं की रास्ते की सेवा में किशोरों का अपना योगदान है। युवाओं मंे तेरापंथ दर्शन का प्रभाव भी रहना चाहिए। आचार्यश्री भिक्षु के जीवनवृत्त को तेरापंथ प्रबोध के माध्यम से भी समझा जा सकता है। किशोरों पर ध्यान देना बहुत महत्त्वपूर्ण है। यह पीढ़ी सुसंस्कारी बनी रहे। किशोरों में अपनी शक्ति और ज्ञान का अच्छा उपयोग करने का संकल्प बना रहे। खूब अच्छा विकास होता रहे। किशोर दिवस के माध्यम से भी अन्य किशोरों को भी जोड़ने का प्रयास हो।

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