80 लाख रुपये से अधिक के चेक रिटर्न मामले में पति-पत्नी बरी
पत्नी के हस्ताक्षर फर्जी निकले, पति को माल मिलने का प्रमाण नहीं मिला

सूरत- करीब दस वर्ष पुराने 80 लाख रुपये से अधिक के चेक रिटर्न मामले में अदालत ने महाराष्ट्र के उल्हासनगर निवासी व्यापारी दंपती को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत में सुनवाई के दौरान पत्नी के नाम से जारी चेकों पर हस्ताक्षर गलत पाए गए, जबकि पति को कथित रूप से कपड़े का माल मिलने का कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया जा सका।
जानकारी के अनुसार, सूरत के रिंग रोड स्थित टी.टी. टावर में कपड़े की दुकान चलाने वाले अशोक मनसुखानी एवं उनकी पत्नी पूजा मनसुखानी ने वर्ष 2016 में उल्हासनगर निवासी रोशनी भाटिया और मनोहर भाटिया के खिलाफ अलग-अलग छह चेक रिटर्न मामले दर्ज कराए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि व्यापारी दंपती ने एक करोड़ रुपये से अधिक का कपड़ा खरीदने के बाद भुगतान नहीं किया।
इन मामलों में रोशनी भाटिया के खिलाफ 70,01,380 रुपये तथा मनोहर भाटिया के खिलाफ 10,48,000 रुपये की राशि को लेकर दावा किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अश्विन जोगड़िया ने महत्वपूर्ण दलीलें पेश कीं।
अधिवक्ता जोगड़िया ने अदालत में रोशनी भाटिया के हस्ताक्षरों को चुनौती दी, जिसके बाद संबंधित चेकों को हस्ताक्षर परीक्षण के लिए गांधीनगर स्थित एफएसएल भेजा गया। एफएसएल की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि चेकों पर किए गए हस्ताक्षर रोशनी भाटिया के नहीं थे। इस आधार पर अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
वहीं मनोहर भाटिया की ओर से यह दलील दी गई कि उन्हें कथित लेन-देन का माल प्राप्त ही नहीं हुआ था। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत बिलों में अलग-अलग फर्मों के नाम दर्ज थे तथा किसी भी बिल पर मनोहर भाटिया के हस्ताक्षर नहीं थे। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए मनोहर भाटिया को भी निर्दोष घोषित कर दिया।




