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सूरत में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का समापन, विकास मॉडल पर जोर

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा बोले— टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रांसपेरेंसी पर खड़ा है गुजरात का विकास

सूरत। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा सूरत स्थित ओरो यूनिवर्सिटी में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (दक्षिण गुजरात) के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने गुजरात के विकास मॉडल को देश के लिए प्रेरणादायक बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू की गई वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट ने गुजरात को वैश्विक निवेश के नक्शे पर स्थापित किया। उन्होंने बताया कि वाइब्रेंट गुजरात मॉडल टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रांसपेरेंसी के तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।


विश्वकर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में गुजरात ने “वसुधैव कुटुंबकम् – One Family, One Earth, One Future” के सिद्धांत को साकार किया है। आज राज्य औद्योगिक, ग्रामीण, मेडिकल, डिजिटल, पर्यटन और हरित अर्थव्यवस्था जैसे अनेक क्षेत्रों में अग्रणी बन चुका है। उन्होंने बताया कि प्रॉ-एक्टिव नीतियां, सिंगल विंडो सिस्टम, मजबूत लॉजिस्टिक्स और डिजिटल गवर्नेंस के कारण गुजरात में व्यवसाय के लिए अनुकूल वातावरण विकसित हुआ है।


उन्होंने भूपेंद्र पटेल और हर्ष संघवी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार की पूरी टीम विकास यात्रा को गति दे रही है।
सूरत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि 16वीं सदी का समृद्ध बंदरगाह आज ‘सिल्क सिटी’ और ‘डायमंड सिटी’ के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां के टेक्सटाइल उद्योग, बड़े व्यापारिक नेटवर्क और लाखों लोगों को मिलने वाला रोजगार इसकी आर्थिक ताकत को दर्शाता है। टेक्सटाइल पॉलिसी-2024 और केंद्र सरकार की विदेश नीति के कारण सूरत के गारमेंट निर्यात को नए वैश्विक बाजार मिले हैं।
उन्होंने बताया कि पीएम मित्र पार्क, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, बुलेट ट्रेन और डायमंड बर्स जैसी परियोजनाएं सूरत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी। दक्षिण गुजरात में जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, केमिकल्स, टूरिज्म और एग्रो-प्रोसेसिंग में अपार संभावनाएं हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘पीएम गतिशक्ति’, ‘पीएलआई योजना’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ जैसे प्रयासों से भारत तेजी से 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है और हर क्षेत्र में गुणवत्ता ही विकास का सही पैमाना है।

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