
सूरत।शहर में हाल ही में कपड़ा मार्केट और मंडप के गोदामों में हुई आग की गंभीर घटनाओं के बाद एक बार फिर अवैध निर्माण का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। लगातार हो रही आग की घटनाओं से आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
राज्य में आग की बढ़ती घटनाओं, खासकर राजकोट में हुई भीषण आग के बाद सूरत महानगरपालिका ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया था। इस SOP के तहत ऐसे सभी भवन, जहां 50 से अधिक लोग एकत्र होते हैं, उनके लिए निर्माण नियमों के अनुसार बने होने का सेल्फ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया।
इसी क्रम में मनपा के लिंबायत ज़ोन द्वारा क्षेत्र की करीब 110 कपड़ा मार्केटों को नोटिस जारी कर सर्टिफिकेट जमा करने के निर्देश दिए गए। सभी मार्केट संचालकों को SOP की प्रति भी भेजी गई थी। इसके बावजूद, बार-बार सूचना देने के बाद अब तक केवल 6 मार्केटों ने ही सेल्फ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट लिंबायत ज़ोन में जमा किया है।
बुधवार को पर्वत पाटिया स्थित राज टेक्सटाइल मार्केट में लगी भीषण आग ने हालात की गंभीरता को और उजागर कर दिया। इस आग पर काबू पाने में फायर ब्रिगेड को करीब 18 घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। घटना के बाद कपड़ा मार्केटों में किए गए अवैध और असुरक्षित निर्माण फिर से सवालों के घेरे में आ गए हैं।
स्थिति को देखते हुए अब लिंबायत ज़ोन ने सख्त रुख अपनाया है। जिन मार्केटों ने अब तक सेल्फ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट जमा नहीं किया है, उन्हें तत्काल यह सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, यदि आने वाले दिनों में भी सर्टिफिकेट जमा नहीं किया गया तो संबंधित मार्केटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।महानगरपालिका का कहना है कि नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सर्वोपरि है और आग जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।




