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व्यापारियों को जानकारी देने जीएसटी विभाग ने मार्गदर्शिका जारी की :

नवंबर के रिटर्न में होगा लागू,3बी रिटर्न के डेटा में अब नहीं हो सकेगा सुधार

हर महीने भरे जाने वाले 3बी रिटर्न में अब सभी विवरण ऑटो-पॉप्युलेटेड ही मिलेंगे। यानी जीएसटीआर-1 में जो जानकारी भरी जाएगी, उसके आधार पर टैक्स की गणना सहित सारी जानकारी 3बी रिटर्न में स्वतः दिखाई देगी। तथा नवंबर महीने का जो रिटर्न 20 दिसंबर से पहले भरना है, उसमें यह नियम लागू होने जा रहा है। इसके कारण अब व्यापारी 3बी रिटर्न में कोई सुधार नहीं कर सकेंगे।

जीएसटी विभाग ने 3बी रिटर्न में सुधार न किए जा सकने का अमल अक्टूबर माह से करने की तैयारी की थी। उस समय व्यापारियों को जानकारी मिल सके इसलिए मार्गदर्शिका भी जारी की गई थी। लेकिन तब यह लागू नहीं हो सका, क्योंकि उसमें कुछ संशोधन किए जाने थे। ये संशोधन पूरे करने के बाद अब नवंबर माह का जो रिटर्न 20 दिसंबर तक भरना होगा, उसमें इसका अमल किया जाएगा। इसके लिए जीएसटी विभाग ने सुधारित मार्गदर्शिका भी जारी कर दी है, क्योंकि आने वाले चार–पाँच दिनों में जीएसटीआर-1 भरने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
जीएसटीआर-1 में जो विवरण भरे जाएंगे, उसी के आधार पर 3बी रिटर्न तैयार होगा। इसलिए व्यापारियों को 3बी रिटर्न अब जीएसटीआर-1 में दी गई जानकारी के आधार पर ही तैयार मिल जाएगा। साथ ही उसमें व्यापारी कोई भी संशोधन नहीं कर पाएंगे। यदि व्यापारियों को कोई सुधार करना हो तो वह जीएसटीआर-1 में ही कर सकेंगे।
इसी कारण जीएसटीआर-1 अत्यंत सावधानी से भरना आवश्यक होगा, क्योंकि की गई एक गलती सुधारने के लिए एक महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है। इसके चलते खरीदी करने वाले व्यापारी को, जिसने जीएसटी चुकाई है, उसकी क्रेडिट मिलने में भी एक महीने तक प्रतीक्षा की स्थिति पैदा हो सकती है।

पहले 3बी रिटर्न में सुधार किया जा सकता था

जीएसटी लागू होने के बाद लगातार सुधार किए जा रहे हैं। उसी क्रम में अब 3बी रिटर्न में सुधार न किए जा सकने का नियम नवंबर के रिटर्न में लागू किया जा रहा है। इससे पहले 3बी रिटर्न में सुधार–वृद्धि करने की व्यवस्था व्यापारियों को दी गई थी, लेकिन अब वे किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं कर सकेंगे।
साथ ही नई मार्गदर्शिका में यह भी प्रावधान किया गया है कि जिन व्यापारियों के पास जीएसटी नंबर नहीं है या जो कंपोज़िशन स्कीम में जुड़े हैं, उनकी जानकारी भी 3बी में दिखाई देने लगे — ऐसा नया सुधार लागू किया गया है।

क्रेडिट भी व्यापारियों को ऑटो-पॉप्युलेटेड ही मिलेगी

जीएसटी 3बी रिटर्न तो व्यापारियों को जीएसटीआर-1 के डेटा के आधार पर तैयार मिलेगा ही। इसके साथ-साथ 2बी में दर्शाई गई जानकारियों के आधार पर आईएमएस में व्यापारी द्वारा एक्सेप्ट और रिजेक्ट की गई एंट्रियों में से एक्सेप्ट की गई क्रेडिट भी स्वतः दिखाई देगी।
इन सभी बातों को ध्यान में रखें तो अब व्यापारियों को पहले रिटर्न भरने में जो कठिनाइयाँ होती थीं, उनमें सुधार होने जा रहा है तथा रिटर्न सरलता से भरने की व्यवस्था की जा रही है।

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