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आचार्य तुलसी महान क्रांतिकारी एवं प्रयोगधर्मी संत थे: मुनि मदन कुमार

30वीं पुण्यतिथि पर आत्म-अनुशासन, स्वाध्याय और संस्कारों को जीवन में अपनाने का आह्वान

सूरत, । जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के नौवें अनुशास्ता आचार्य श्री तुलसी की 30वीं पुण्यतिथि पर अडाजण में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुनि श्री मदन कुमार ने उन्हें महान क्रांतिकारी, प्रयोगधर्मी संत, राष्ट्रसंत और समाज सुधारक बताते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।

वे वेड़ रोड से विहार कर अडाजण स्थित मुनि श्री कल्प कुमार के सांसारिक पक्षीय परिजनों के निवास पर पहुंचे, जहां आयोजित प्रवचन में उन्होंने कहा कि आचार्य तुलसी ने व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने अणुव्रत आंदोलन के जरिए देश में नैतिकता, चरित्र निर्माण और आत्म-अनुशासन का संदेश दिया।

मुनि श्री मदन कुमार ने वर्तमान पीढ़ी की जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि युवा देर रात तक मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, जबकि वास्तविक ज्ञान सत्साहित्य से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा, “यदि साहित्य के प्रति अनुराग जाग जाएगा तो मोबाइल के प्रति अपने आप विराग पैदा हो जाएगा।” उन्होंने आचार्य तुलसी के 25 खंडों में प्रकाशित ‘मेरा जीवन-दर्शन’ के नियमित स्वाध्याय की प्रेरणा देते हुए कहा कि उनका अनुशासन, समय प्रबंधन और कार्यशैली प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनुकरणीय है।

उन्होंने विश्व शांति के लिए प्रेक्षाध्यान के नियमित अभ्यास, सकारात्मक जीवनशैली अपनाने तथा घर-घर में सामूहिक सामायिक और स्वाध्याय का वातावरण बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आचार्य तुलसी द्वारा संपादित आगम साहित्य जीवन की अमूल्य निधि है, जिसका अध्ययन व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करता है।

इस अवसर पर मुनि श्री संयम कुमार ने कहा कि आचार्य तुलसी अंतिम समय तक साहित्य सृजन में सक्रिय रहे और युवाओं को प्रतिदिन उनके साहित्य का कम से कम एक पृष्ठ पढ़ने का संकल्प लेना चाहिए। मुनि श्री कल्प कुमार ने कहा कि आचार्य तुलसी ने तेरापंथ धर्मसंघ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए समण श्रेणी, उपासक श्रेणी, ज्ञानशाला, परमार्थिक शिक्षण संस्था सहित अनेक महत्वपूर्ण उपक्रम प्रारंभ किए तथा आगम संपादन जैसा ऐतिहासिक कार्य संपन्न कराया।

कार्यक्रम में अणुव्रत विश्व भारती के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अर्जुन मेडतवाल ने मुक्तकों के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की। कमलेश मेहता ने मुनि श्री का स्वागत किया, जबकि कल्प कुमार के सांसारिक पक्षीय परिजनों ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त कर आचार्य तुलसी के प्रति श्रद्धा अर्पित की

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