सूरत। शहर के पुणा क्षेत्र में बाल श्रमिकों के शोषण का मामला एक बार फिर सामने आया है। श्रम विभाग की टास्क फोर्स ने सीताराम नगर और मुक्तिधाम सोसायटी स्थित छह हैंडवर्क एवं साड़ी फोल्डिंग कारखानों पर कार्रवाई कर 13 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया। इनमें बिहार के चंपारण जिले से लाई गई तीन नाबालिग किशोरियां भी शामिल हैं।
मददनीश श्रम आयुक्त एवं बाल श्रमिक मुक्ति टास्क फोर्स के सचिव हरीशचंद्र गामित के नेतृत्व में 29 और 30 मई को शहरभर में विशेष अभियान चलाया गया। अन्य क्षेत्रों में कोई मामला सामने नहीं आया, लेकिन पुणा की मुक्तिधाम और सीताराम सोसायटी के कारखानों में 13 नाबालिग काम करते मिले। सभी बच्चों को रेस्क्यू कर चिल्ड्रन होम भेज दिया गया।
जांच के दौरान तीनों किशोरियों ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें सुबह से देर रात तक लगातार काम कराया जाता था। अन्य 10 बाल श्रमिकों की स्थिति भी बेहद दयनीय पाई गई।
गौरतलब है कि मई माह के मध्य में राजस्थान पुलिस और एक एनजीओ ने इसी इलाके में छापा मारकर 86 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया था। उस समय कई बच्चों की उम्र महज 7 से 8 वर्ष पाई गई थी और उनसे 15 घंटे से अधिक समय तक काम कराया जा रहा था।
इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद मात्र दस दिन के भीतर उसी क्षेत्र से फिर बाल श्रमिकों का मिलना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इससे यह आशंका भी गहराती है कि बाल श्रमिकों के खिलाफ अभियान के बावजूद अवैध नेटवर्क अब भी सक्रिय है।




