
सूरत। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा वर्ष 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वस्त्र एवं परिधान निर्यात के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 23 एवं 24 जून को नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स, आईसीएआर में आयोजित राष्ट्रीय कपड़ा परामर्श शिखर सम्मेलन में दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसजीसीसीआई) के अध्यक्ष अशोक जिरावाला ने एमएमएफ (मैन-मेड फाइबर) आधारित टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
विशेष आमंत्रित उद्योग प्रतिनिधि के रूप में संबोधित करते हुए जिरावाला ने कहा कि वैश्विक स्तर पर लगभग 70 प्रतिशत फाइबर की खपत एमएमएफ आधारित है, जबकि भारत में अभी भी प्राकृतिक रेशों का प्रभुत्व है। ऐसे में निर्यात बढ़ाने के लिए एमएमएफ सेक्टर पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने केंद्र सरकार से सूरत में राष्ट्रीय सिंथेटिक फैब्रिक डेटा बैंक एवं फैब्रिक लाइब्रेरी की स्थापना, रीसाइकल्ड पॉलिएस्टर के लिए राष्ट्रीय मानक एवं प्रमाणन व्यवस्था, एमएमएफ उत्पादन क्षमता बढ़ाने की राष्ट्रीय रणनीति, पोस्ट-कंज्यूमर पॉलिएस्टर गारमेंट्स के केमिकल रीसाइक्लिंग हेतु विश्वस्तरीय प्लांट तथा एमएसएमई इकाइयों के लिए एआई आधारित फैशन फोरकास्टिंग सॉफ्टवेयर विकसित करने की मांग की। साथ ही एफटीए वाले देशों के लिए एचएसएन-वार मांग रिपोर्ट, वैश्विक मानकों पर आधारित राष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली तथा एमएमएफ निर्यात प्रोत्साहन के लिए मिशन मोड कार्यक्रम शुरू करने का भी सुझाव दिया।
जिरावाला ने कहा कि फाइबर से लेकर यार्न, वीविंग, निटिंग, प्रोसेसिंग, एम्ब्रॉयडरी, गारमेंटिंग और निर्यात तक की पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन एक ही शहर में होने के कारण सूरत देश का सबसे उपयुक्त एमएमएफ हब है। इसलिए प्रस्तावित राष्ट्रीय सिंथेटिक फैब्रिक लाइब्रेरी एवं डेटा बैंक की स्थापना सूरत में की जानी चाहिए।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि इन सुझावों को लागू किया जाता है तो सूरत अकेले ही प्रतिवर्ष 10 से 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त वस्त्र एवं परिधान निर्यात में योगदान देकर वर्ष 2030 तक 100 बिलियन डॉलर के राष्ट्रीय निर्यात लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
एसजीसीसीआई ने इस व्यापक परामर्श कार्यक्रम के आयोजन के लिए वस्त्र मंत्रालय की सराहना करते हुए भविष्य में भी उद्योग जगत के सुझावों को नीति निर्माण में शामिल करने की अपेक्षा व्यक्त की।


