
जोधपुर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद टेक्सटाइल फैक्ट्रियों को बंद किए जाने के विरोध में श्रमिकों का प्रदर्शन मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। श्रमिकों ने सर्किट हाउस के बाहर प्रदर्शन कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित समिति को ज्ञापन सौंपते हुए बंद टेक्सटाइल फैक्ट्रियों को पुनः शुरू करने की मांग की। इससे पूर्व सोमवार को श्रमिकों ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा था।
ज्ञापन में कहा गया कि जोधपुर का टेक्सटाइल उद्योग पूरी तरह बंद होने से इससे जुड़े हजारों श्रमिकों, कर्मचारियों, कारीगरों, ट्रांसपोर्टरों, छोटे व्यापारियों और उनके परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। टेक्सटाइल उद्योग शहर की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है और इससे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है।
श्रमिकों ने कहा कि वर्तमान में सभी टेक्सटाइल इकाइयां बंद हैं। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र में रंगयुक्त अथवा प्रदूषित पानी मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं तो उसके वास्तविक स्रोत की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए। बिना पर्याप्त जांच के पूरे टेक्सटाइल उद्योग को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि उद्योग बंद रहने से जोधपुर के निर्यात कारोबार, स्थानीय व्यापार तथा सरकारी राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। श्रमिकों ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि एसटीपी और सीईटीपी दोनों के उपचारित जल के पुनः उपयोग पर बल दिया गया है। उनका आरोप है कि प्रशासन केवल सीईटीपी से जुड़े उद्योगों पर दबाव बना रहा है, जबकि एसटीपी का उपचारित एवं अनुपचारित जल जोजरी नदी में प्रवाहित होकर जलभराव और प्रदूषण का प्रमुख कारण बन रहा है, उस पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
श्रमिकों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर टेक्सटाइल उद्योग को शीघ्र पुनः संचालित करने की अनुमति दी जाए, ताकि हजारों परिवारों की आजीविका सुरक्षित रह सके।




