सूरत पुलिस का ‘मिशन मिलाप’ बना हजारों परिवारों की उम्मीद
एआई तकनीक और मानव सूझबूझ से 18 साल से लापता लोगों को मिलाया परिवारों से

सूरत। आधुनिक दौर में जहां तकनीक का उपयोग अपराध रोकने के लिए किया जाता है, वहीं सूरत पुलिस ने इसी तकनीक का उपयोग मानवीय संवेदनाओं के साथ कर एक मिसाल पेश की है। पुलिस कमिश्नर अनुपमसिंह गेहलोत द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन मिलाप’ अभियान के तहत पिछले चार महीनों में 1000 से अधिक गुमशुदा लोगों को उनके परिवारों से मिलाया गया है। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जो पिछले 18 वर्षों से लापता थे।
गुजरात के डीजीपी डॉ. के.एल. राव के “ऑपरेशन मुस्कान” से प्रेरित होकर शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वर्षों से बिछड़े बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को खोजकर सुरक्षित उनके घर पहुंचाना था। पुलिस कमिश्नर स्वयं प्रतिदिन अभियान की समीक्षा कर रहे थे, जिसके चलते वर्ष 2007 से लंबित मामलों में भी सफलता मिली।
इस अभियान की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर डॉ. करणराज वाघेला को सौंपी गई थी। उनके मार्गदर्शन में डीसीपी भावेश रोजिया, एसीपी के.एम. जोसेफ तथा मिसिंग सेल के पीआई एम.बी. शेरगिल की टीम ने लगातार मेहनत कर बड़ी सफलता हासिल की।
पुलिस टीम ने वर्ष 2007 से अब तक के करीब 4500 गुमशुदा लोगों का डाटाबेस तैयार किया। मिसिंग सेल की टीम रोजाना करीब 25 परिवारों से संपर्क कर नई जानकारियां जुटाती रही।
डॉ. करणराज वाघेला ने बताया कि अभियान की सफलता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। गुम होने के समय के चेहरे और वर्षों बाद के वर्तमान चेहरे का मिलान कर पहचान सुनिश्चित की गई।
सूरत पुलिस के इस मानवीय प्रयास और तकनीक के बेहतर समन्वय की शहरभर में सराहना हो रही है।



