पुलिस स्टेशनों में दर्ज होने वाली क्रॉस शिकायतों के खिलाफ गृह राज्य मंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
जबरन क्रॉस शिकायत लेने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित, सख्त गाइडलाइन जारी करने की मांग

सूरत।राज्य के पुलिस स्टेशनों में शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर अब वकीलों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। सूरत की वरिष्ठ महिला अधिवक्ता प्रीति जिज्ञेश जोशी ने इस मुद्दे पर राज्य के गृह राज्य मंत्री को पत्र लिखकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है और तत्काल सुधार की मांग की है।
गृह राज्य मंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि जब कोई वकील या सामान्य नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन पहुंचता है, तब कई मामलों में पुलिस द्वारा सामने वाले पक्ष की भी “क्रॉस शिकायत” दर्ज कराने के लिए दबाव बनाया जाता है। वकीलों का कहना है कि यह प्रवृत्ति कानून की भावना और न्यायिक प्रक्रिया के विरुद्ध है।
ज्ञापन में विभिन्न मामलों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि क्रॉस शिकायत दर्ज होने से मूल अपराध की गंभीरता कम हो जाती है और जांच की दिशा भटक जाती है। दोनों पक्षों की शिकायतें होने के कारण पुलिस जांच में अनावश्यक देरी होती है, जिससे आरोपियों को लाभ मिल सकता है।
वकीलों ने आरोप लगाया कि ऐसी प्रक्रिया से उनकी पेशेवर स्वतंत्रता प्रभावित होती है और वे निर्भय होकर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पाते। कई बार वास्तविक शिकायतकर्ता पर झूठी क्रॉस शिकायत का दबाव बनाकर समझौता करने के लिए मजबूर किया जाता है।
अधिवक्ता प्रीति जोशी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय व्यवस्था के अनुसार किसी भी गंभीर अपराध की जानकारी मिलने पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके बावजूद अनावश्यक रूप से क्रॉस शिकायत दर्ज कराने का दबाव बनाना कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन माना जाना चाहिए।
उन्होंने गृह राज्य मंत्री से मांग की कि इस गंभीर मुद्दे को ध्यान में रखते हुए राज्य स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि पुलिस निष्पक्ष रूप से कार्य करे और किसी भी शिकायतकर्ता को क्रॉस शिकायत के नाम पर अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।




