
सूरत। गुजरात हाईकोर्ट द्वारा अदालतों में दाखिल की जाने वाली अर्जियों के लिए लागू किए गए नए फॉन्ट और ए-4 आकार के कागज के नियम के खिलाफ सूरत के वकीलों ने भी विरोध का बिगुल बजा दिया है। सूरत जिला वकील मंडल के आह्वान पर बड़ी संख्या में वकीलों ने कामकाज से अलग रहकर न्यायालय परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार के पास एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों के आंदोलन के कारण न्यायालय का नियमित कामकाज भी प्रभावित हुआ।
गुजरात हाईकोर्ट की ओर से जारी किए गए एक परिपत्र के तहत राज्य की अदालतों में दाखिल होने वाली अर्जियों के लिए एक निश्चित फॉन्ट अनिवार्य किया गया है। नए नियम के अनुसार हाथ से लिखी अथवा सामान्य तरीके से टाइप की गई अर्जियों के बजाय कंप्यूटर पर निर्धारित प्रारूप और निश्चित फॉन्ट में तैयार की गई अर्जियां ही स्वीकार की जाएंगी। इसके अलावा अब लीगल पेपर के स्थान पर दोनों तरफ प्रिंट किए जा सकने वाले ए-4 आकार के कागज का उपयोग करने का भी प्रावधान किया गया है। इन नए नियमों को 1 अगस्त से लागू किया गया है।
हालांकि, नए नियम लागू होने के बाद वकीलों को तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। निर्धारित फॉन्ट, प्रारूप और ए-4 कागज से संबंधित कई तरह की तकनीकी दिक्कतें सामने आने के कारण सूरत सहित पूरे गुजरात के वकीलों में नाराजगी बढ़ गई है। वकीलों का कहना है कि नए नियमों के कारण न्यायालय में दस्तावेज तैयार करने और दाखिल करने की प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी बढ़ गई है।
नए नियमों के विरोध को लेकर सूरत जिला वकील मंडल के पदाधिकारियों तथा सूरत से निर्वाचित बार काउंसिल ऑफ गुजरात के सदस्यों की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में निर्णय लिया गया कि नए नियमों के विरोध में दो दिनों तक न्यायालय के कामकाज से अलग रहकर आंदोलन किया जाएगा। इसी निर्णय के तहत शुक्रवार सुबह से ही बड़ी संख्या में वकील न्यायालय के मुख्य प्रवेश द्वार के पास एकत्र होने लगे और उन्होंने हाईकोर्ट के परिपत्र के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
सूरत जिला वकील मंडल के अध्यक्ष उदय पटेल ने सभी वकीलों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की थी। इसके बाद सुबह से ही बड़ी संख्या में वकील विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और नए नियमों को वापस लेने अथवा उनमें आवश्यक सुधार करने की मांग को लेकर अपना रोष व्यक्त किया।
विरोध प्रदर्शन में सूरत के दोनों वकील मंडलों के अध्यक्ष उदय पटेल और नीलकंठ बारोट, मंत्री संजय पटेल और मुकुंद रमाणी, सहमंत्री कवन पटेल, कोषाध्यक्ष दिव्या कोसंबिया, एल.आर. फेनी पटेल, बार काउंसिल ऑफ गुजरात के सदस्य हरेश नाकराणी, भावेश रबारी, जकी शेख, हितेश पटेल, प्रीति जोशी, हिरल पानवाला सहित बड़ी संख्या में वकील शामिल हुए।
वकीलों का कहना है कि ए-4 आकार के कागज और निर्धारित फॉन्ट के उपयोग को लेकर हाईकोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बाद से उन्हें लगातार तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। दस्तावेज तैयार करने और दाखिल करने के दौरान कई तरह की त्रुटियां सामने आ रही हैं, जिसके चलते वकीलों को पिछले कई दिनों से परेशानी उठानी पड़ रही है।
वकीलों का आरोप है कि नए नियमों को लागू करने से पहले व्यावहारिक एवं तकनीकी समस्याओं का पर्याप्त समाधान नहीं किया गया। इसके कारण अदालतों में अर्जियां दाखिल करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। लगातार बढ़ती परेशानियों के बीच आखिरकार सूरत के वकीलों ने हाईकोर्ट के इन दिशा-निर्देशों के खिलाफ आंदोलन का रास्ता अपनाया है। वकीलों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक वे नए नियमों के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेंगे।




