
नई दिल्ली। देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और RuPay डेबिट कार्ड के जरिए होने वाले भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय ने 50 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक टर्नओवर वाले बड़े कारोबारियों पर बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं द्वारा MDR शुल्क वसूलने का कानूनी रास्ता साफ कर दिया है। इस फैसले का असर अमेज़न, फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों सहित अन्य बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा।
सरकार पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन कर यह व्यवस्था लागू करने जा रही है। प्रस्तावित संशोधन के तहत बड़े व्यापारियों को अब UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर MDR देना पड़ सकता है।
मार्च 2026 में वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि MDR शुल्क समाप्त होने के कारण UPI भुगतान प्रणाली का आर्थिक रूप से टिकाऊ संचालन चुनौतीपूर्ण हो गया है। सामान्यतः बैंक भुगतान प्रसंस्करण, तकनीकी ढांचे और अन्य परिचालन खर्चों की भरपाई के लिए 1 से 3 प्रतिशत तक MDR वसूलते हैं। हालांकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जनवरी 2020 में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR को समाप्त कर दिया गया था।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2,000 रुपये तक के लेनदेन करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत सब्सिडी जारी रहेगी। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
वित्त मंत्रालय ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (संशोधन) विधेयक, 2026’ के माध्यम से संबंधित कानूनी प्रावधानों में बदलाव कर रहा है। सरकार का कहना है कि इस कदम से बड़े कारोबारियों के लिए भुगतान प्रणाली अधिक संतुलित बनेगी, जबकि छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रहेंगे।



