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भव्य तुलसी यात्रा के साथ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ

राणी सती दादी मंदिर के रजत जयंती वर्ष पर आयोजित कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, भागवताचार्य राधेश्याम शास्त्री ने बताया भक्ति का महत्व

सूरत। श्री शक्ति धाम सेवा समिति द्वारा श्री राणी सती दादी मंदिर के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का मंगलवार को भव्य तुलसी यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। यह धार्मिक आयोजन 9 से 15 जून तक सिटी लाइट स्थित महाराजा अग्रसेन पैलेस के पंचवटी हॉल में प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित किया जाएगा।

कथा प्रारंभ होने से पूर्व मंगलवार सुबह राणी सती दादी मंदिर से भव्य तुलसी यात्रा निकाली गई। यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई कथा स्थल पहुंची। तुलसी यात्रा में बग्गी पर विराजमान भागवताचार्य राधेश्याम शास्त्री श्रद्धालुओं का आशीर्वाद स्वीकार करते हुए चल रहे थे। हजारों महिलाएं सिर पर तुलसी धारण कर जयकारों के साथ यात्रा में शामिल हुईं, वहीं यजमान परिवार पवित्र भागवत पोथी को सिर पर धारण कर अग्रिम पंक्ति में चल रहा था।

कथा के शुभारंभ पर यजमान परिवार द्वारा व्यास पूजन किया गया। इसके पश्चात भागवताचार्य राधेश्याम शास्त्री ने व्यासपीठ से श्रीमद्भागवत महात्म्य का विस्तृत वर्णन करते हुए भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने सनकादिक ऋषियों, नैमिषारण्य तथा शौनकादि ऋषियों से संबंधित प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।

शास्त्रीजी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण का सौभाग्य केवल भगवान की कृपा से ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास में श्री राणी सती दादी की प्रेरणा और कृपा से यह कथा आयोजित हो रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान गोविंद की शरण ग्रहण किए बिना जीवन के संतापों से मुक्ति संभव नहीं है। भगवत स्मरण और भक्ति ही मानव जीवन के कल्याण का मार्ग है।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप है तथा इसका श्रवण एवं पाठ जीव को मोक्ष और वैकुंठ की प्राप्ति कराने वाला है। कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव’ तथा ‘रामा-रामा रटते-रटते बीती सारी उमरिया’ पर श्रद्धालु भावविभोर होकर भक्ति रस में डूब गए।

वर्तमान सामाजिक परिवेश पर चिंता व्यक्त करते हुए राधेश्याम शास्त्री ने कहा कि सत्संग मानव जीवन को ऊंचाइयों तक पहुंचाता है, जबकि कुसंगति व्यक्ति के पतन का कारण बनती है। उन्होंने कहा कि आज समाज में बच्चों को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि संस्कार देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जीवित रहते हुए स्वयं को भगवान को समर्पित कर देना ही सच्चा कल्याण है।

कथा के दौरान ‘श्रीकृष्ण शरणं ममः’ के मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। आयोजन समिति ने बताया कि बुधवार को कथा में शिव विवाह तथा सुखदेव आगमन प्रसंग का वर्णन किया जाएगा।

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