
सूरत। बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सूरत शहर पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 57 साइबर अपराध दर्ज किए गए तथा 60 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 31 मई से 2 जून तक चले इस तीन दिवसीय अभियान में 23.85 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी का पर्दाफाश हुआ है, जबकि 1.04 करोड़ रुपये से अधिक की राशि फ्रीज की गई है।
पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलौत ने बताया कि साइबर ठगी में अपराधी लोगों से ठगी गई रकम विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर अंततः एटीएम के माध्यम से निकाल लेते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में उपयोग होने वाले “म्यूल अकाउंट” साइबर अपराधों की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। जांच में सामने आया कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को किराया अथवा कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे।
आरोपी आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर सहित केवाईसी दस्तावेज हासिल कर संबंधित व्यक्तियों के नाम पर बैंक खाते खोलते थे। इसके बाद एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी अपने कब्जे में रखकर साइबर ठगी में इन खातों का इस्तेमाल करते थे।
इस अभियान से पहले लगभग एक माह तक व्यापक तैयारी की गई थी। शहर के सभी पुलिस स्टेशनों की साइबर टीमों को संदिग्ध म्यूल अकाउंट की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही बैंक अधिकारियों, फिनटेक कंपनियों, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं और दूरसंचार विभाग के साथ समन्वय बैठकें आयोजित की गईं। 16 मई को 500 से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर विशेषज्ञों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था।
इसके बाद करीब 50 टीमों को विभिन्न राज्यों में रवाना किया गया। NCCRP, SAMANVAYA और SAHYOG पोर्टलों के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर गुजरात के अलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित कई राज्यों से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अभियान के दौरान सबसे अधिक 18 मामले साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज हुए, जहां 20 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। इसके अलावा जहांगीरपुरा, डिंडोली, सरथाणा, सचिन, वराछा, कपोद्रा, गोडादरा सहित विभिन्न पुलिस स्टेशनों में भी मामले दर्ज किए गए।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी होटल बुकिंग फ्रॉड, इंश्योरेंस पॉलिसी फ्रॉड, निवेश के नाम पर ठगी, फर्जी ऑनलाइन शॉपिंग, वर्क वीजा, डायमंड ट्रेनिंग, ड्राइविंग लाइसेंस, एपीके फाइल के जरिए मोबाइल हैकिंग, लोन फ्रॉड, पार्सल डिलीवरी तथा अन्य कई तरीकों से लोगों को अपना शिकार बनाते थे। पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क को झटका लगा है और भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।




