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सूरत से दक्षिण गुजरात के विकास को मिलेगी नई ऊर्जा : हर्ष संघवी

गुजरात का जीडीपी 27.4 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान, निवेशकों के लिए पारदर्शी और सरल व्यवस्था

सूरत। सूरत में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राज्य के गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस के आयोजन से सूरत सहित पूरे दक्षिण गुजरात के विकास को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। गुजरात स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने बताया कि वाइब्रेंट गुजरात को क्षेत्रीय स्तर तक पहुँचाने के उद्देश्य से राज्य के चार ज़ोन में इस प्रकार की कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं।
उन्होंने वाइब्रेंट गुजरात की दो दशक की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2003 में राज्य का जीडीपी 1.29 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2012-13 में बढ़कर 7.20 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचा। आगे बढ़ते हुए वर्ष 2022-23 में यह 21.90 लाख करोड़ रुपये हो गया है तथा वर्ष 2025 तक 27.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है। देश के कुल जीडीपी में 8.2 प्रतिशत योगदान के साथ गुजरात आज देश का “ग्रोथ इंजन” बन चुका है।
राज्य की औद्योगिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि ब्लू इकोनॉमी क्षेत्र में चार गुना वृद्धि हुई है तथा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के मामले में गुजरात देश में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स राज्य में ऐतिहासिक परिवर्तन लाएँगे। उद्योगकारों को सुविधा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने पारदर्शी और सरल नीतियाँ लागू की हैं, जिससे प्रोत्साहन सहायता प्राप्त करने हेतु अब सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रही।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य सरकार द्वारा 5,619 करोड़ रुपये के इंसेंटिव वितरित किए गए, जिनमें से सूरत के 11 हजार से अधिक व्यापारियों को लगभग 1,300 करोड़ रुपये की सहायता सीधे प्रदान की गई। सरकार को निवेशकों की मित्र, भागीदार और हितैषी बताते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सूरत में भी रिकॉर्ड स्तर पर निवेश आकर्षित होगा।
“विकसित भारत 2047” के विज़न के अंतर्गत तैयार सूरत इकोनॉमिक डेवलपमेंट प्लान के तहत दक्षिण गुजरात की जीडीपी हिस्सेदारी को वर्ष 2047 तक 20 प्रतिशत तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि देश के लगभग 60 प्रतिशत सोलर पैनल एवं सेल का उत्पादन दक्षिण गुजरात में होता है, जबकि सूरत देश के 75 प्रतिशत वस्त्र उत्पादन और निर्यात का केंद्र है तथा विश्व के लगभग 90 प्रतिशत हीरों की कटिंग एवं पॉलिशिंग भी यहीं की जाती है। स्वच्छता के क्षेत्र में भी सूरत की अग्रणी पहचान का उल्लेख करते हुए उन्होंने उद्योगकारों से उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।

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