विस्कोस यार्न पर एंटी डंपिंग ड्यूटी की सिफारिश से सूरत के वीवर्स में चिंता का माहौल
ड्यूटी लागू होने पर उत्पादन घटने और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की आशंका

सूरत। विस्कोस यार्न पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लागू करने की डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्रालय को की गई सिफारिश की खबर सामने आते ही सूरत के वीविंग उद्योग में चिंता का माहौल पैदा हो गया है। उद्योग से जुड़े व्यापारियों का मानना है कि यदि यह ड्यूटी लागू होती है तो शहर के कपड़ा उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है। इसे लेकर टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े संगठनों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार को विस्कोस वीवर्स एसोसिएशन की बैठक आयोजित की गई, जिसमें उद्योगकारों ने एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश का विरोध किया। बैठक के बाद एसोसिएशन ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय तथा वस्त्र मंत्रालय को पत्र लिखकर विस्कोस यार्न पर ड्यूटी नहीं लगाने की मांग करते हुए विस्तृत प्रस्तुति भेजी है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि देश में विस्कोस यार्न का उत्पादन करने वाली कुछ कंपनियों के प्लांट लगभग 60 वर्ष पुराने हैं, जिसके कारण यहां निर्मित यार्न की गुणवत्ता अपेक्षाकृत कम रहती है। दूसरी ओर सूरत के वीविंग उद्योग में आधुनिक मशीनें 700 से 800 आरपीएम की गति से संचालित होती हैं, जबकि देश में उत्पादित यार्न इस गति पर प्रभावी रूप से नहीं चल पाता। उद्योगकारों का कहना है कि ऐसे यार्न के उपयोग से उत्पादन क्षमता में करीब 25 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
उद्योग प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि पिछले सात वर्षों में सूरत के टेक्सटाइल उद्योग ने आधुनिकीकरण के तहत नई मशीनरी में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है। यदि विस्कोस यार्न पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लागू की जाती है तो उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ सूरत के वीवर्स की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
विस्कोस वीवर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि उद्योग हितों को ध्यान में रखते हुए विस्कोस यार्न पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि कपड़ा उद्योग की उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा प्रभावित न हो।



