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ई-वे बिल में मामूली त्रुटियों पर वाहनों को घंटों रोकने से ट्रांसपोर्टरों में आक्रोश

सूरत। ई-वे बिल में छोटी-मोटी तकनीकी त्रुटियों को लेकर राज्य जीएसटी अधिकारियों द्वारा ट्रांसपोर्टरों के वाहनों को घंटों तक रोककर रखे जाने की शिकायतें सामने आने लगी हैं। चोरी या कर अपवंचना की मंशा न होने के बावजूद सख्त कार्रवाई किए जाने से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों में रोष का माहौल बन गया है।
नियमों के अनुसार 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य का माल एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए ई-वे बिल बनाना अनिवार्य है। हालांकि ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि हाल के दिनों में सूरत-अहमदाबाद हाईवे पर राज्य जीएसटी विभाग द्वारा चलाए जा रहे जांच अभियान के दौरान ई-वे बिल की सूक्ष्म जांच के नाम पर वाहनों को रोका जा रहा है। बिल में पूरा पता दर्ज न होना, जीएसटी नंबर में टाइपिंग गलती, वाहन नंबर या अन्य सामान्य त्रुटियों को आधार बनाकर दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है तथा कई वाहनों को लंबे समय तक खड़ा रखा जा रहा है, जिससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि कई बार व्यापारी जल्दबाजी में ई-वे बिल तैयार करते हैं और उसमें हुई छोटी गलती का खामियाजा ट्रांसपोर्टर को भुगतना पड़ता है। जानकारों के अनुसार जहां ई-वे बिल बना हुआ हो, वहां कर चोरी की मंशा मानना उचित नहीं है। बिना ई-वे बिल के माल परिवहन के मामलों में कार्रवाई जरूरी है, लेकिन मामूली त्रुटियों को गंभीर उल्लंघन मानकर ट्रांसपोर्टरों को परेशान करना व्यापारिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर डाल रहा है।
कारोबारियों का यह भी कहना है कि वाहनों को घंटों रोके जाने से समय पर डिलीवरी प्रभावित हो रही है, अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है और ड्राइवरों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने विभाग से व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने और तकनीकी त्रुटियों के मामलों में चेतावनी या सुधार का अवसर देने की मांग की है।
इस बीच कार्रवाई के दौरान कथित उगाही की चर्चाएं भी व्यापारिक हलकों में जोर पकड़ रही हैं। बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में बिना ई-वे बिल के पकड़े गए वाहनों पर नियमानुसार दंड लगाया गया, जबकि कुछ वाहन चालकों को दबाव बनाकर राशि लेकर छोड़ देने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। व्यापारिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने की मांग की है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि नियमों का पालन सभी के लिए आवश्यक है, लेकिन कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जिससे व्यापार और परिवहन गतिविधियां बाधित न हों तथा ईमानदार कारोबारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके।

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