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गजेरा बंधुओं को हाईकोर्ट से राहत नहीं, 1928 करोड़ की ठगी केस में गिरफ्तारी की आशंका बढ़ी

सूरत। शहर के चर्चित गजेरा परिवार के खिलाफ दर्ज 1928 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने वसंत गजेरा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज कर दी, जिससे अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गजेरा बंधुओं को 15 दिन की अंतरिम राहत दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेगा और एफआईआर रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता मामले के अनुसार, कतारगाम निवासी वसंत गजेरा, उनके भाई चुनी, अशोक, बकुल और भतीजे राकेश गजेरा पर शांति रेसिडेंसी कंपनी के भागीदार प्रवीण अग्रवाल के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि गजेरा बंधुओं ने प्रवीण अग्रवाल की 43 प्रतिशत हिस्सेदारी घटाकर मात्र 4 प्रतिशत कर दी आरोप है कि प्रवीण की संपत्तियों को कम कीमत पर बेच दिया गया और करोड़ों रुपये हवाला के जरिए हांगकांग में रहने वाले राकेश गजेरा को भेजे गए। बाद में राकेश ने खुद को विदेशी निवेशक बताकर कंपनी में डायरेक्टर पद हासिल कर लिया। इसके अलावा प्रवीण अग्रवाल के फर्जी हस्ताक्षर कर उनका इस्तीफा भी तैयार कर लिया गया इस पूरे प्रकरण में प्रवीण अग्रवाल ने एडवोकेट डॉ. शैलेश पटेल के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर सूरत क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज हुई थी गिरफ्तारी के डर से गजेरा बंधुओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां से उन्हें 15 दिन की राहत मिली थी। इसके बाद वसंत गजेरा ने हाईकोर्ट में क्वैशिंग पिटीशन दाखिल कर एफआईआर रद्द करने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पुलिस जांच तेज होने की संभावना है और सभी आरोपियों को जांच में सहयोग करना अनिवार्य होगा। कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस कभी भी उनकी गिरफ्तारी कर सकती है।

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