
नई दिल्ली/सूरत। वित्त वर्ष 2025-26 के समापन के साथ ही जीएसटी से जुड़े महत्वपूर्ण अनुपालनों (Compliances) की समय-सीमा नजदीक आ गई है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि करदाता निर्धारित समय पर जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं करते हैं, तो उन्हें जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में व्यापारियों को मार्च और अप्रैल माह के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
कम्पोजीशन स्कीम का अंतिम अवसर
छोटे करदाताओं के लिए कम्पोजीशन स्कीम में शामिल होने या उससे बाहर निकलने का विकल्प 31 मार्च 2026 तक उपलब्ध है। यह योजना 1.5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले व्यवसायियों के लिए सरल कर व्यवस्था प्रदान करती है।
निर्यातकों के लिए LUT अनिवार्य
जो निर्यातक बिना आईजीएसटी चुकाए माल निर्यात करना चाहते हैं, उन्हें प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए एलयूटी (LUT) दाखिल करना अनिवार्य है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आरएफडी-11 फॉर्म 31 मार्च 2026 से पहले जमा करना होगा।
QRMP स्कीम में बदलाव की समय सीमा
5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले करदाता QRMP स्कीम के तहत तिमाही रिटर्न और मासिक कर भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं। अप्रैल-जून तिमाही के लिए इस स्कीम में बदलाव की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है।
जॉब वर्क और ITC-04 नियम
जॉब वर्क के तहत भेजे गए इनपुट 365 दिनों के भीतर वापस आना चाहिए, जबकि कैपिटल गुड्स 3 वर्ष के भीतर लौटना अनिवार्य है। ITC-04 फॉर्म की अगली देय तिथि 25 अप्रैल 2026 तय की गई है।
रिटर्न का मिलान जरूरी
व्यापारियों को GSTR-1 और GSTR-3B रिटर्न का मिलान अपने खरीद रजिस्टर से करना चाहिए। साथ ही अन्य आय, क्रेडिट नोट, एडवांस एडजस्टमेंट और स्क्रैप या फिक्स्ड एसेट की बिक्री की भी समीक्षा आवश्यक है।
नई इनवॉइस सीरीज लागू करें
नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल 2026 से इनवॉइस, बिल ऑफ सप्लाई, रसीद वाउचर, रिफंड वाउचर तथा डेबिट-क्रेडिट नोट के लिए नई और यूनिक सीरीज लागू करना जरूरी होगा।
ई-इनवॉइसिंग अब 5 करोड़ पर अनिवार्य
1 अप्रैल 2026 से 5 करोड़ रुपये से अधिक एग्रीगेट टर्नओवर वाले करदाताओं के लिए ई-इनवॉइसिंग अनिवार्य कर दी गई है। यह नियम बी2बी, एसईजेड और निर्यात आपूर्ति पर लागू होगा।
ब्लॉक्ड क्रेडिट पर आईटीसी नहीं
मोटर वाहन, फूड एवं बेवरेज तथा वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट जैसी श्रेणियों में ब्लॉक्ड क्रेडिट पर आईटीसी का दावा करने पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है।
क्रॉस चार्ज और ISD नियमों का पालन जरूरी
कई राज्यों में शाखाएं रखने वाली कंपनियों के लिए मुख्य कार्यालय द्वारा सेवाओं का क्रॉस चार्ज करना आवश्यक है। साथ ही इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर (ISD) के माध्यम से क्रेडिट का वितरण नियमानुसार करना होगा।कर विशेषज्ञ सीए नितेश अग्रवाल के अनुसार, “समय पर जीएसटी अनुपालन न केवल जुर्माने से बचाता है, बल्कि व्यवसाय की वित्तीय साख को भी मजबूत करता है।”
व्यापारियों को सलाह दी गई है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज और रिटर्न समय पर पूर्ण कर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से बचें।



