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विश्व बाल मजदूरी निषेध दिवस: सूरत प्रशासन की सख्त कार्रवाई से 176 बच्चों को मिला नया जीवन

जनवरी-2025 से मई-2026 तक 118 किशोर और 58 बच्चे मुक्त, 31 आपराधिक मामले व 10 एफआईआर दर्ज

सूरत। 12 जून को विश्व बाल मजदूरी निषेध दिवस के अवसर पर सूरत जिला प्रशासन ने बाल मजदूरी उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे अपने सघन अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों को सुरक्षित और शिक्षित बचपन उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित विशेष जिला टास्क फोर्स द्वारा शहर में ‘रेड, रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन’ की त्रिस्तरीय रणनीति के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। इस टास्क फोर्स में श्रम विभाग, पुलिस, शिक्षा विभाग, प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जो नियमित बैठक कर अभियान की समीक्षा करते हैं।

प्रशासन की सक्रियता का ही परिणाम है कि जनवरी-2025 से मई-2026 के दौरान कुल 176 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया। इनमें 118 किशोर और 58 बच्चे शामिल हैं, जिन्हें खतरनाक और शोषणपूर्ण कार्यों से बचाया गया। वहीं कानून का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ 31 आपराधिक मामले दर्ज किए गए तथा 10 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं।

‘बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986’ के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना प्रतिबंधित है। जबकि 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक उद्योगों में कार्य पर लगाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना और छह माह तक की जेल का प्रावधान है।

मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्हें चिल्ड्रन होम में आश्रय देने के बाद चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की प्रक्रिया पूरी कर परिजनों को सौंपा जाता है तथा उनकी शिक्षा जारी रखने के लिए स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाता है।

जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि कहीं भी बाल मजदूरी की जानकारी मिलने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1098 या 155372 पर सूचना दें, ताकि हर बच्चे को सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक बचपन मिल सके।

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