सूरत के सभी औद्योगिक इकाइयों में बाल मजदूरी विरोधी बोर्ड लगाना अनिवार्य
प्रशासन का सख्त निर्देश, नियमों का पालन नहीं करने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई

सूरत। हाल ही में सूरत जिले के टेक्सटाइल उद्योगों में विभिन्न संस्थाओं और पुलिस द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियान के दौरान 86 बाल श्रमिकों को मुक्त कराए जाने के बाद जिला प्रशासन ने बाल मजदूरी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इस गंभीर मामले को ध्यान में रखते हुए सूरत शहर एवं जिला प्रशासन ने बाल एवं किशोर श्रम रोकने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।
प्रशासन के आदेश के अनुसार सूरत शहर और जिले के सभी GIDC एस्टेट, औद्योगिक इकाइयों, फैक्ट्रियों, निर्माण स्थलों तथा सार्वजनिक स्थानों पर “बाल मजदूरी कानूनी अपराध है” दर्शाने वाले साइन बोर्ड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
इन साइन बोर्डों पर बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 की प्रमुख दंडात्मक धाराओं का उल्लेख करना होगा। साथ ही बाल संरक्षण के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 (टोल-फ्री) भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य रहेगा। यह जानकारी हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं में लिखी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंच सके।
प्रशासन ने बताया कि बाल मजदूरी करवाना कानूनन अपराध है। अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर नियोक्ता को 6 महीने से 2 वर्ष तक के कारावास अथवा 20 हजार रुपये से 1 लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों प्रकार की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
जिला प्रशासन ने सभी औद्योगिक संगठनों, फैक्ट्री संचालकों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि बाल मजदूरी उन्मूलन के लिए बनाए गए नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का उद्देश्य बाल मजदूरी पर पूर्ण रोक लगाकर बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराना है।




