Uncategorized

जल्दबाजी में ITR भरना पड़ सकता है भारी, टैक्सपेयर्स को हो सकता है नुकसान

सूरत। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग का सीजन शुरू होते ही कई करदाता जल्दबाजी में अपना रिटर्न भर देते हैं, लेकिन बिना पूरी और अपडेटेड जानकारी के ITR फाइल करना भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार ITR एक सेल्फ असेसमेंट फॉर्म है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आय के आधार पर भरना आवश्यक होता है।

सामान्यतः नौकरीपेशा और छोटे करदाताओं द्वारा ITR-1 एवं ITR-4 फॉर्म का उपयोग किया जाता है, जिनकी अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। वहीं व्यवसाय से जुड़े करदाताओं के लिए ITR-3 और ITR-4 भरने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तय की गई है।

टैक्स कंसल्टेंट नारायण शर्मा ने बताया कि कई वित्तीय संस्थाएं, बैंक, कंपनियां और अन्य विभाग अपने लेन-देन संबंधी आंकड़े सरकार को 31 मई तक उपलब्ध करवाते हैं। इसके बाद यह जानकारी करदाताओं के 26AS, AIS और TIS में लगभग 15 जून 2026 तक अपडेट होती है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति इससे पहले जल्दबाजी में ITR फाइल कर देता है तो उसकी आय और ट्रांजेक्शन की पूरी जानकारी रिटर्न में शामिल नहीं हो पाती।

उन्होंने बताया कि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का ब्याज, सेविंग अकाउंट का ब्याज, शेयर बाजार से हुई कमाई, म्यूचुअल फंड की खरीद-बिक्री, टीडीएस कटौती, एडवांस टैक्स, जीएसटी रिपोर्ट, टर्नओवर रिपोर्ट, हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन तथा कैश जमा और निकासी जैसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां बाद में अपडेट होती हैं।

ऐसी स्थिति में अधूरी जानकारी के आधार पर भरी गई ITR के कारण भविष्य में आयकर विभाग की ओर से नोटिस आ सकता है और करदाता को जवाब देने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सभी करदाताओं को AIS, TIS और 26AS में पूरी जानकारी अपडेट होने के बाद ही अपनी आयकर रिटर्न फाइल करनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की परेशानी या आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button