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70.03 लाख रुपये के चेक रिटर्न के 9 मामलों में व्यापारी को एक-एक वर्ष की सजा

उधार माल खरीदकर दिए गए चेक हुए थे बाउंस

सूरत-सूरत की अदालत ने चेक रिटर्न के अलग-अलग मामलों में आरोपी हिमांशु चंदुलाल शाह को दोषी ठहराते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रत्येक मामले में एक-एक वर्ष की साधारण कारावास की सजा सुनाई है तथा कुल 70,03,433 रुपये का मुआवजा शिकायतकर्ता को अदा करने का आदेश दिया है।

मामले के अनुसार शिकायतकर्ता दिनेश जयरामदास धनकाणी, रीघन फैशन्स प्रा. लि. के डायरेक्टर हैं और यार्न व फैब्रिक्स के व्यापार से जुड़े हुए हैं। आरोपी हिमांशु शाह ने शिकायतकर्ता कंपनी से विभिन्न बिलों और चालानों के माध्यम से उधार माल खरीदा था। बकाया राशि की मांग किए जाने पर आरोपी ने भुगतान के रूप में अलग-अलग तारीख और राशि के कुल 13 चेक दिए थे, जिनकी कुल कीमत 70,03,433 रुपये थी।

शिकायतकर्ता द्वारा चेक बैंक में जमा कराने पर सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत विधिक स्टेच्यूटरी डिमांड नोटिस भेजी, लेकिन आरोपी ने न तो नोटिस का जवाब दिया और न ही भुगतान किया। इसके चलते सूरत कोर्ट में चेक रिटर्न के 9 अलग-अलग मामले दर्ज किए गए।

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने कंपनी के अस्तित्व संबंधी दस्तावेज, बिल, चालान, ई-वे बिल, लेजर खाते, मूल चेक, बैंक रिटर्न मेमो, डिमांड नोटिस, पोस्टल रसीद, आयकर तथा जीएसटी रिटर्न सहित विभिन्न दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। साथ ही आरोपी द्वारा सलाबतपुरा पुलिस स्टेशन में दी गई आवेदन की प्रति भी साक्ष्य के रूप में पेश की गई।

शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता केतन पी. रेशमवाला एवं जिमी बी. कांटलीवाला ने विस्तृत दलीलें प्रस्तुत कीं। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद सूरत न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत ने आरोपी हिमांशु चंदुलाल शाह को दोषी घोषित किया। अदालत ने प्रत्येक मामले में एक वर्ष की साधारण कैद की सजा सुनाने के साथ कुल 70,03,433 रुपये का मुआवजा शिकायतकर्ता को भुगतान करने का आदेश दिया है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान करने में विफल रहता है तो प्रत्येक मामले में अतिरिक्त छह माह की कैद की सजा भुगतनी होगी।

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