पिताविहीन बेटियों को पी.पी. सवाणी के आंगन में कन्यादान के साथ मिला पिता और भाई का स्नेह

— सास ने बहू को तुलसी देकर मां बनने का संकल्प लिया, बेटियों को सहेजने वाली श्रेष्ठ सासों के हाथों दीप प्रज्वलन
— वल्लभभाई सवाणी पर ‘आरोहण’ और महेशभाई सवाणी पर ‘प्रेरणामूर्ति’ पुस्तकों का विमोचन
— आज 55 और कल 57 बेटियों का महापुरुषों के हाथों कन्यादान
— पी.पी. सवाणी की बेटियों–दामादों द्वारा गठित ‘सेवा संगठन’ मोबाइल ऐप का लोकार्पण
सूरत, 20 दिसंबर — सूरत के सेवाभावी पी.पी. सवाणी परिवार के आंगन में एक बार फिर मानवता, संवेदना और रिश्तों की सुगंध के साथ कोयलडी नामक भव्य समूहमंगल का आयोजन किया गया। इस भावनात्मक आयोजन में आज 55 पिताविहीन बेटियों का कन्यादान किया गया, जबकि आगामी दिवस 57 बेटियों का कन्यादान किया जाएगा। पी.पी. सवाणी चैतन्य विद्यासनकुल, अब्रामा में आयोजित इस समारोह में बेटियों को केवल विवाह नहीं, बल्कि पिता, भाई और परिवार का भरोसा भी मिला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हर्ष संघवी ने बेटियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि पी.पी. सवाणी परिवार द्वारा आयोजित यह समूहमंगल केवल सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि माता–पिता का साया खो चुकी बेटियों को परिवार की ऊष्मा देकर विवाह से लेकर विवाह के बाद तक जिम्मेदारी निभाना अत्यंत महान कार्य है। यह पहल समाज को नई दिशा देने वाली है।
समारोह में 5000 से अधिक बेटियों के पालक पिता माने जाने वाले महेशभाई सवाणी ने कहा, “बेटी के सिर पर हाथ रखना चारधाम यात्रा जितना पुण्य है। जब सास बहू को बेटी मानकर अपनाती है, तभी सच्चा परिवार बनता है।” उन्होंने यह भी बताया कि थैलेसीमिया की रोकथाम हेतु विवाह पूर्व जांच की शुरुआत कराई गई है। इस वर्ष कोयलडी समूहमंगल में 37 जातियों, 4 राज्यों और 17 जिलों की कुल 133 बेटियां विवाहबंधन में बंधेंगी, जिनमें से लगभग 90 प्रतिशत बेटियां ऐसी हैं जिनके न पिता हैं और न ही भाई।
इस समूहमंगल की सबसे भावुक और अनूठी परंपरा तब देखने को मिली जब सासों ने अपनी बहुओं को तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया और उन्हें हाथ पकड़कर मंडप तक ले गईं। इसके साथ ही बेटियों को सहेजने वाली श्रेष्ठ सासों के हाथों दीप प्रज्वलन कर उनका विशेष सम्मान किया गया, जो समाज के लिए एक नई और प्रेरणादायी मिसाल बनी।
कार्यक्रम के दौरान लेखक–विचारक शैलेषभाई सगपरिया द्वारा लिखित वल्लभभाई सवाणी के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘आरोहण’ तथा डॉ. जितेंद्र अढिया द्वारा लिखित महेशभाई सवाणी के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘प्रेरणामूर्ति’ का विमोचन किया गया। साथ ही विवाहोपरांत पिताविहीन बेटियों द्वारा लिखे गए भावनात्मक पत्रों का संकलन ‘कोयलडी’ पुस्तक भी प्रकाशित की गई।
इसके अतिरिक्त पी.पी. सवाणी की बेटियों और दामादों द्वारा गठित ‘सेवा संगठन’ की मोबाइल ऐप का लोकार्पण भी किया गया, जिससे सामाजिक सेवा गतिविधियों को डिजिटल रूप से और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
समारोह में पद्मश्री सम्मानित विभूतियों, जनप्रतिनिधियों, संत–महंतों, उद्योगजगत के अग्रणियों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया। कोयलडी समूहमंगल ने यह सिद्ध किया कि यह आयोजन केवल विवाह नहीं, बल्कि संवेदना, जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों का सजीव उत्सव है।




