अहम का वहम निकाल दिजिए, जीवन खुशहाल हो जाएगा-आचार्यश्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी

दादा श्री जिनदत सूरी तपस्या का हुआ शुभारम्भ व बियासने का पारणा आज होगा
सिद्धि तप की तपस्या का आगाज आज से
बाड़मेर। कर्म ही व्यक्ति के सुख-दुख का निर्धारण करता है। सद्कर्म करो तो धरती में स्वर्ग सा जीवन प्राप्त हो सकता है। भगवान महावीर तो यहां तक कहते है कि किसी का दिल दुखाना भी पाप बोध है। चातुर्मास का जो समय है वो समय इसलिए उपयुक्त है कि वो अपने पाप कर्मो का नाश करते हुए पुण्य कर्म को इक्कठा कर ले। ये बात खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्रीजिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने दैनिक प्रवचन के दौरान मंगलवार को सुधर्मा प्रवचन वाटिका में कही।

जब तक आप केवल प्रवचन सुनने आ रहे है तो इसका कोई उपयोग नही है जब तक पुरे प्रवचन में किसी एक लाइन को भी जीवन में उतारेंगे तभी इसकी सार्थकता है। उन्होंने कहा कि हम प्रार्थना करते है या याचना करते है इसे समझे। जो परमात्मा ने पाया है उसे पाने की भावना को प्रार्थना कहते है वही जो परमात्मा ने छोड़ा है उसे पाने की भावना को याचना कहते है। अहम के भाव आपको आगे नही बढने नही देंगे पर अहम का वहम निकाल दिजिए जीवन में खुशहाली आएगी। पुण्य जिसका प्रकट होता तब पद, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान सब प्राप्त होता है। आज के प्रवचन से केवल एक लाइन को समझे कि जीवन में कर्म एक खाता है आपका प्रोफिट एवं लोस अंकाउट है। पुण्य कर्म सब देगा और पाप कर्म सब छीन लेगा। गुरूदेव ने कहा कि आप सभी को सिद्धि तप की तपस्या करने का भाव रखना है और क्षमता रखनी है।

खरतरगच्छ संघ चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष अशोक धारीवाल व ट्रस्टी बाबुलाल संखलेचा ने बताया कि श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ चातुर्मास व्यवस्था कमेटी के तत्वावधान में सुधर्मा प्रवचन वाटिका में चल रहे संघशास्ता वर्षावास 2025 के दौरान प्रवचनमाला के शुभारम्भ में संगीतकार गौरव मालू द्वारा गुरूवन्दन कर व मुनि मुखरप्रभसागरजी म.सा. द्वारा भक्ति भाव गीत प्रस्तुत किया गया। धारीवाल ने बताया कि मंगलवार से दादा जिनदतसूरी तप का शुभारम्भ हो गया हैं, जिनके बियासने का पारणा शालीभद्र भोजन मण्डप में प्रातः 07.30 बजे होगा और बुधवार से सिद्धितप की तपस्या शुरू होगी, जिसमें एक उपवास, एक बियासना, दो उपवास बियासना, तीन उपवास, बियासना, चार उपवास, बियासना ऐसे तपस्या निरंतर चलती रहेगी।

चातुर्मास कमेटी के ट्रस्टी उपाध्यक्ष ओमप्रकाश भंसाली व मीडिया संयोजक कपिल मालू ने बताया कि श्री जिनकांतिसागरसूरी आराधना भवन में बहिन म.सा. साध्वी डाॅ. विधुतप्रभा श्री की निश्रा प्रतिदिन प्रातः 06.30 बजे से 07.15 बजे तक स्वाध्याय की क्लाश चालू है, जिसमें देवचन्द्र चौबीसी का अर्थ बताया जा रहा है, प्रतिदिन दोपहर में 02.30 बजे से 03.00 बजे तक सूत्र गाथा कण्ठस्थ की क्लाश चालू है व दोपहर 03.00 बजे 04.00 बजे तक महिलाओं व बालिकाओं की स्वाध्याय शिविर सोमवार से शुक्रवार तक रहेगी। शनिवार व रविवार को 02.00 बजे से 04.30 बजे तक बच्चों व बालिकाओं का शिविर होगा। सुधर्मा प्रवचन वाटिका में प्रतिदिन 02.30 बजे 04.30 बजे तक साध्वीजी की निश्रा में होगी। मंगलवार का तेले की तपस्या उषादेवी महावीरकुमार मालू व लड़ी आयंबिल पायल राकेशकुमार धारीवाल का रहा। गुरूदेव के दर्शन के लिए बाहरी राज्यों से गुरूभक्तों के आना-जाना निरंतर जारी है, जिसमें मुम्बई से रमेश श्रीश्रीमाल गुरूदेव के दर्शन को पधारे जिनका चातुर्मास कमेटी की ओर से लाभार्थी परिवारों द्वारा अभिनन्दन किया गया।




