सूरत में खाड़ीपूर की स्थायी रोकथाम के लिए 500 करोड़ रुपये की योजना, सरकार ने बनाई दो समितियां
मास्टर प्लान और डीपीआर तैयार कर जलभराव की समस्या का होगा स्थायी समाधान
सूरत। सूरत में हर वर्ष खाड़ीपूर (बाढ़) और जलभराव की गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए गुजरात सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री द्वारा 500 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा के बाद राज्य सरकार ने राज्य और शहर स्तर पर दो अलग-अलग समितियों का गठन किया है। इन समितियों का उद्देश्य शहर में जलभराव, खाड़ीपूर नियंत्रण तथा भविष्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था के लिए मास्टर प्लान और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करना है।
शहरी विकास एवं शहरी गृह निर्माण विभाग ने राज्य स्तर पर एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता विभाग के अपर मुख्य सचिव करेंगे। समिति में सूरत महानगरपालिका, सूडा, जिला प्रशासन, सड़क एवं भवन विभाग, जल संसाधन विभाग, सिंचाई विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह समिति बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन कर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए कार्यों की समीक्षा करेगी।
वहीं, सूरत महानगरपालिका आयुक्त की अध्यक्षता में शहर स्तर की समिति भी बनाई गई है। यह समिति राज्य सरकार के निर्देशों का पालन कराने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने, बैठकों का आयोजन करने तथा स्थायी समाधान के लिए तैयार किए जाने वाले प्रोजेक्ट रिपोर्ट की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का कार्य करेगी। सरकार विशेषज्ञ सलाहकार एजेंसी की सहायता से सूरत के लिए व्यापक बाढ़ नियंत्रण मास्टर प्लान तैयार कराने की तैयारी कर रही है।
हालांकि, समितियों के गठन के साथ ही प्रशासनिक चूक भी चर्चा का विषय बन गई है। जारी सूची में सूरत महानगरपालिका के सिटी इंजीनियर के रूप में जतीन देसाई का नाम शामिल किया गया है, जबकि वे नवंबर 2025 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वहीं वर्तमान में सिटी इंजीनियर का कार्यभार संभाल रहे अधिकारी का पदनाम भी सही रूप में दर्ज नहीं किया गया है। इस त्रुटि को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया और समिति गठन की सटीकता पर सवाल उठने लगे हैं।




