पालनपुर गुजरात में हुआ ” तेरापंथ : मेरा पंथ कार्यशाला” का सफल समायोजन

दिनांक -19:07:2026
पालनपुर
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के निर्देशन में तेरापंथ सभा पालनपुर द्वारा ” तेरापंथ : मेरा पंथ” कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला प्रशिक्षक सूरत उधना से समागत प्रवक्ता उपासक श्री अर्जुनजी मेड़तवाल ने नमस्कार महामंत्र का मंगल उच्चारण करते हुए कार्यशाला का शुभारंभ करवाया ।
तत्पश्चात पालनपुर तेरापंथ महिला मंडल ने भिक्षु अष्टकम द्वारा मंगलाचरण किया।कोषाध्यक्ष भरत परीख ने स्वागत वक्तव्य एवम् प्रशिक्षक श्री का संक्षेप में परिचय दिया।
कार्यशाला में मार्गदर्शन देते हुए प्रशिक्षक मेड़तवाल जी ने कहा आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष में हमारे आराध्य के प्रति समर्पण भाव प्रस्तुत करने के साथ तेरापंथ के दर्शन को समझने का सुअवसर हमें प्राप्त हो रहा है यह हमारा सौभाग्य है। इसके लिए हम पूज्य गुरुदेव के प्रति कृतज्ञ हैं।
उन्होंने कहा – आचार्य भिक्षु ने आगमों का गहन अध्ययन कर धर्म के शुद्ध स्वरूप को प्रस्तुत किया । रूढ़ मान्यताओं से ऊपर उठकर जैन दर्शन के सिद्धांतों की समझ दी।सम्यक्त्व का महत्व, तेरापंथ की स्थापना से लेकर साध्य साधन की मीमांसा, दान, दया, प्रतिमा पूजा के संदर्भ में स्वामीजी के दर्शन को विस्तार से समझाया।
लौकिक और लोकोत्तर दान का भेद समझाया। धर्म दान के तीन प्रकार- ज्ञान दान,संयति दान,अभयदान पर विस्तृत प्रकाश डाला एवं आचार विचार का उल्लेख किया। अर्जुनलालजी की समझाने की शैली प्रभावी एवं सरल भाषा में थी। कार्यक्रम लगभग 4 घंटे तक चला। उन्होंने अपने ज्ञान , मुक्तक प्रस्तुति एवं तत्त्व चर्चा द्वारा सभीको आकृष्ट किया।
पालनपुर सभा अध्यक्ष श्री विनोद जी परीख ने बताया कि 16 वर्ष पहले सन् 2010 में श्री अर्जुनलाल जी मेड़तवाल की पालनपुर में उपासक यात्रा हुई थी। उसके बाद तेरापंथ : मेरा पंथ कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में उनका पुनः आना हुआ। महासभा की प्रेरणा से आयोजित यह सुंदर कार्यक्रम सफल रहा। पूज्य प्रवर की पालनपुर क्षेत्र पर अनन्य कृपादृष्टि रही है। पू.गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करते हैं। पालनपुर महिला मंडल, ज्ञानशाला के सभी सदस्यों ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अंत में कार्यशाला के सुंदर संचालन के लिए श्री अर्जुनलाल जी का आभार व्यक्त किया गया।
संकलन – भरत परीख




