
सूरत। खाड़ी युद्ध समाप्त होने के बाद पॉलिएस्टर यार्न उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसके मुकाबले यार्न उत्पादकों द्वारा अपेक्षित स्तर पर भाव कम नहीं किए जाने से सूरत समेत दक्षिण गुजरात के टेक्सटाइल उद्योग में नाराजगी फैल गई है।
मिली जानकारी के अनुसार खाड़ी युद्ध खत्म होने के बाद उसके असर अब धीरे-धीरे बाजार में दिखाई देने लगे हैं। इसी के तहत सूरत और दक्षिण गुजरात के पॉलिएस्टर यार्न उद्योग के लिए अहम माने जाने वाले कच्चे माल के दाम जुलाई की शुरुआत में ही नीचे आए हैं।
जानकारी के मुताबिक एमईजी के दाम में प्रति किलो 14.20 रुपये और पॉलिएस्टर मेल्ट के भाव में 4.83 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। 27 जून से 1 जुलाई के बीच मेल्ट के दामों में औसतन 10.35 रुपये प्रति किलो तक कमी आई है।
इसके बावजूद पीओवाई, एफडीवाई और अन्य मदर यार्न उत्पादकों ने यार्न के दामों में केवल 3 रुपये प्रति किलो तक ही कटौती की घोषणा की है। इससे उद्योग जगत में असंतोष का माहौल है और व्यापारियों का मानना है कि कच्चे माल में आई राहत का पूरा लाभ बाजार और अंतिम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रहा है।
सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने हाल ही में कस्टम ड्यूटी में मिली छूट, जो 30 जून को समाप्त होनी थी, उसे बढ़ाकर 15 जुलाई तक जारी रखा है। इस राहत के चलते भी कच्चे माल की कीमतों में कमी बनी हुई है, लेकिन उसका पूरा फायदा अब तक ग्राहकों को नहीं मिल सका है।
टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ सीधे ग्राहकों तक पहुंचना चाहिए, ताकि बाजार में संतुलन बना रहे और उद्योग को राहत मिल सके।




