
सूरत। जुलाई माह की शुरुआत के साथ ही जीएसटी के तहत GSTR-3B रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। नए नियम के अनुसार अब व्यापारी GSTR-3B में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की राशि में अपनी ओर से किसी प्रकार की बढ़ोतरी, कटौती या अन्य संशोधन नहीं कर सकेंगे।
अब GSTR-2B में जो आईटीसी ऑटोमैटिक रूप से उपलब्ध होगी, उसी के आधार पर GSTR-3B रिटर्न फाइल करना अनिवार्य होगा। इस बदलाव के बाद व्यापारियों के लिए रिटर्न भरने से पहले सभी खरीद बिलों और आईटीसी की जानकारी का मिलान करना पहले से अधिक जरूरी हो गया है।
जीएसटी रिटर्न प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से यह नई व्यवस्था लागू की गई है। पहले व्यापारी GSTR-3B में आईटीसी के आंकड़ों में आवश्यक सुधार कर सकते थे, लेकिन अब यह विकल्प समाप्त कर दिया गया है। इससे GSTR-2B और GSTR-3B के बीच अंतर कम होगा और गलत आईटीसी क्लेम पर भी नियंत्रण लगेगा।
नए नियम के तहत व्यापारियों को हर महीने GSTR-2B में दर्शाई गई आईटीसी और अपनी खरीद के बिलों का मिलान करना लगभग अनिवार्य हो गया है। यदि किसी सप्लायर ने समय पर GSTR-1 दाखिल नहीं किया या उसमें कोई त्रुटि की है, तो उसका सीधा असर खरीदार को मिलने वाले आईटीसी पर पड़ेगा। ऐसे मामलों में संबंधित सप्लायर से तुरंत संपर्क कर सुधार करवाना जरूरी होगा।
यदि GSTR-1 में कोई गलती हुई हो तो उसका सुधार GSTR-1A के माध्यम से केवल GSTR-3B दाखिल करने से पहले ही किया जा सकेगा। एक बार GSTR-3B फाइल हो जाने के बाद उस महीने के विवरण में संशोधन का अवसर नहीं मिलेगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य कर चोरी रोकना, गलत आईटीसी दावों पर अंकुश लगाना और रिटर्न प्रक्रिया को अधिक डिजिटल एवं पारदर्शी बनाना है। हालांकि शुरुआती दौर में छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए यह प्रणाली चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि अब उन्हें यह भी निगरानी रखनी होगी कि उनके सप्लायर समय पर रिटर्न दाखिल कर रहे हैं या नहीं।




