MSME उद्योगों को राहत दिलाने के लिए SGCCI की मांग
ECLGS 5.0 ऋण पर स्टाम्प ड्यूटी माफ करने का अनुरोध, मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

सूरत। वेस्ट एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का असर अब गुजरात के उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। बढ़ती लॉजिस्टिक लागत, सप्लाई चेन में व्यवधान और कार्यशील पूंजी की कमी से जूझ रहे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को राहत दिलाने के लिए सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) ने राज्य सरकार से महत्वपूर्ण मांग की है।
चैंबर के अध्यक्ष अशोकभाई जीरावाला ने मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल को पत्र लिखकर भारत सरकार की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS 5.0) के तहत लिए जाने वाले ऋणों की मॉर्गेज डीड पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी को पूर्णतः माफ करने अथवा उसमें पर्याप्त राहत देने का अनुरोध किया है।
पत्र में कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के कारण निर्यात, व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। सूरत सहित गुजरात के हजारों MSME उद्योग बढ़ती उत्पादन लागत, भुगतान में देरी और बाजार की अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में ECLGS 5.0 योजना उद्योगों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता और कार्यशील पूंजी का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती है।
हालांकि, इस योजना के तहत ऋण प्राप्त करने के लिए संपत्ति गिरवी रखने की अनिवार्यता और मॉर्गेज दस्तावेजों पर लगने वाली भारी स्टाम्प ड्यूटी छोटे एवं मध्यम उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। SGCCI का मानना है कि यदि स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी जाती है तो MSME इकाइयों के लिए ऋण लेना आसान होगा, उनकी नकदी स्थिति मजबूत होगी और उत्पादन गतिविधियां निर्बाध रूप से जारी रह सकेंगी।
इस मांग की प्रतिलिपि गृह मंत्री हर्ष संघवी, वित्त मंत्री कनुभाई देसाई, राजस्व विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जयंती रवि तथा वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी. नटराजन को भी भेजी गई है। चैंबर ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर टेक्सटाइल, डायमंड और अन्य MSME क्षेत्रों से जुड़े लाखों परिवारों को राहत प्रदान करेगी। :::




