असम के चाय बागानों की 1100 जनजातीय बेटियों का सामूहिक विवाह, सूरत की संस्था ने निभाई बड़ी भूमिका

सूरत। सेवा, संस्कार और धर्मरक्षा के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए पूर्वांचल सामूहिक विवाह अनुष्ठान समिति, सूरत द्वारा इस वर्ष असम के विभिन्न जनजातीय क्षेत्रों में 1100 जनजातीय बेटियों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। संस्था की ओर से आयोजित यह विशाल अनुष्ठान पिछले कई वर्षों की परंपरा का विस्तार माना जा रहा है।

समिति के प्रमुख विजय कुमार चौमाल के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम को समिति के संरक्षक राकेश कंसल का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। आयोजन धर्मजागरण समन्वय-सूरत विवाह समिति के माध्यम से संपन्न कराया गया।
यह सामूहिक विवाह अनुष्ठान असम के तेजपुर, तिनसुकिया, दिमापुर, जोराहाट तथा कार्बी आंगलोंग (जागीरोड) सहित सुदूर जनजातीय क्षेत्रों में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के साथ समाज में सेवा, एकता और संस्कारों का संदेश देना रहा।

इस पुनीत कार्य में सूरत की भागीदारी को प्रत्यक्ष रूप से देखने तथा व्यवस्थाओं में सहयोग देने के लिए एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ने चार दिवसीय असम दौरा भी किया। प्रतिनिधिमंडल में राकेश कंसल, उनकी धर्मपत्नी प्रीति कंसल, विजय कुमार चौमाल तथा सीए बाल किशन अग्रवाल प्रमुख रूप से शामिल रहे।
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि यह आयोजन केवल विवाह कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज सेवा और धर्मरक्षा का अभियान है। सूरत के दानदाताओं और समाजजनों के सहयोग से पूर्वोत्तर भारत की जरूरतमंद बेटियों के जीवन में नई खुशियां लाने का प्रयास लगातार जारी है।



