
सूरत। शहर के भटार क्षेत्र में रहने वाले एक वृद्ध को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 26 दिन तक तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 1.47 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को सूरत साइबर क्राइम सेल ने अहमदाबाद से गिरफ्तार किया है। आरोपी के बैंक खाते में पीड़ित के 39 लाख रुपये जमा होने का खुलासा हुआ है।
साइबर क्राइम सेल से मिली जानकारी के अनुसार भटार क्षेत्र में रहने वाले 72 वर्षीय मयूर भाई (नाम परिवर्तित) सेवानिवृत्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं। गत 2 जनवरी को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाली महिला ने स्वयं को मुंबई साइबर क्राइम विभाग की अधिकारी बताकर बातचीत शुरू की। इसके बाद व्हाट्सएप मैसेज, वॉइस मैसेज और वीडियो कॉल के माध्यम से वृद्ध को बताया गया कि उनके आधार कार्ड से एक सिम कार्ड जारी हुआ है, जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग तथा सरकार एवं धर्म विरोधी संदेश भेजने में किया गया है।
आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि मामला गंभीर है और उनके खिलाफ सीबीआई जांच बैठाई जा सकती है अथवा गिरफ्तारी वारंट जारी हो सकता है। डर का माहौल बनाकर वृद्ध को लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया और मुंबई बुलाने की धमकी दी गई। इस दौरान उन्हें किसी से संपर्क न करने की हिदायत देकर 26 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट जैसा माहौल बनाकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.47 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।
जांच के दौरान सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने आरोपी उर्जीत सच्चित आनंद कवी (उम्र 37), निवासी आकांक्षा, सेवी स्वराज-1, गोडरेज गार्डन सिटी के सामने, जगतपुर-गोटा, अहमदाबाद को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि आरोपी के आईसीआईसीआई बैंक खाते में पीड़ित के 39 लाख रुपये जमा हुए थे, जबकि उसी खाते में कुल 2.84 करोड़ रुपये की संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुई है। एनसीसीआरपी पोर्टल की जांच में इस खाते से जुड़े देशभर के विभिन्न राज्यों में कुल 12 शिकायतें दर्ज पाई गई हैं।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी जांच एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी अथवा जांच की धमकी दिए जाने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें और किसी भी परिस्थिति में धनराशि ट्रांसफर न करें।




